केंद्र की मोदी सरकार ने PoK में भारतीय सेना द्वारा अंजाम दिए गए सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े किसी भी सबूत को जारी ना करने का फैसला किया है. सरकार का मानना है कि सबूत सामने आने से पाकिस्तानी सेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लेकिन सरकार ऐसा नहीं करना चाहती.
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, कुछ सरकारी सूत्रों ने कहा है कि 'इस वक्त भारत युद्ध करने के समर्थन में नहीं है. लेकिन अगर फिर भी युद्ध के हालात बनते हैं तो भारत लड़ने और जीतने के लिए तैयार है.'
सरकारी सूत्र ने यह भी कहा कि भारत को सर्जिकल स्ट्राइक पर कूटनीतिक समर्थन भी मिला क्योंकि किसी भी देश ने हिंदुस्तान के इस कदम का विरोध नहीं किया. पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले चीन ने भी इस मामले पर कोई विरोध दर्ज नहीं किया. इतना ही नहीं बहुत से इस्लामिक देशों की तरफ से आने वाले बयान भी भारत के समर्थन में थे.
सूत्र ने यह भी बताया कि 2017 की गणतंत्र दिवस समारोह में अबुधाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहान को बुलाना भी कूटनीति का ही हिस्सा है.
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, कुछ सरकारी सूत्रों ने कहा है कि 'इस वक्त भारत युद्ध करने के समर्थन में नहीं है. लेकिन अगर फिर भी युद्ध के हालात बनते हैं तो भारत लड़ने और जीतने के लिए तैयार है.'
सरकारी सूत्र ने यह भी कहा कि भारत को सर्जिकल स्ट्राइक पर कूटनीतिक समर्थन भी मिला क्योंकि किसी भी देश ने हिंदुस्तान के इस कदम का विरोध नहीं किया. पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले चीन ने भी इस मामले पर कोई विरोध दर्ज नहीं किया. इतना ही नहीं बहुत से इस्लामिक देशों की तरफ से आने वाले बयान भी भारत के समर्थन में थे.
सूत्र ने यह भी बताया कि 2017 की गणतंत्र दिवस समारोह में अबुधाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहान को बुलाना भी कूटनीति का ही हिस्सा है.



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