अमरपाल श्शर्मा हो सकते हैं भीतरघात का शिकार ! Amarpal Shasharma may be the victim



साहिबाबाद, ( संजय त्रिपाठी ) साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में कौन विजयी होगा इसे लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है । लोगों में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी की जीत लेकर दावा - प्रतिदावा का दौर पिछले एक माह से जारी है । अब सिर्फ दो दिन बाद ही मतगणना के साथ ही यह स्पष्ट हो जायेगा कि इस बार साहिबाबाद की सीट पर किसका कब्जा हुआ । लेकिन चुनाव से लेकर अब तक जो आंकड़ा और जानकारी उपलब्ध हुई है, उसके अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी अमरपाल श्श्र्मा भीतरधात का शिकार हुए है । वहीं इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी सुनील श्शर्मा की जीत की आशंका जताया जा रहा है । 
11 फरवरी को मतदान के दिन कई क्षेत्रों में अमरपाल श्शर्मा और सुनील श्शर्मा में जबरदस्त टक्कर दिखी । लेकिन क्षेत्र की सभी पाॅश कालोनियों में भाजपा मजबूत स्थिति में दिखाई दी, वहीं मुस्लिम बहुल इलाकों को छोड़ कर मलिन वस्तियों में भी  भाजपा का जादू सर चढ़ कर बोलते देखा गया । अमरपाल श्शर्मा एक तरफ कांग्रेस के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा साथ न देने के कारण कुछ क्षेत्रों में कमजोर नजर आये हैं वहीं दूसरी ओर उनके साथ के कुछ लोग भी भीतरघात कर भाजपा को समर्थन किए हैं । हालांकि लड़ाई काटे की रही है, फिर भी लोगों का झुकाव भाजपा व मोदी के तरफ होने के कारण इस बार इस सीट पर भाजपा बाजी मार सकती है । जिस तरह से मतदान के दिन भारी संख्या में वोटर अपने घरों से निकल कर वोट करने गया और अपने बातों से यह एहसास करा रहा था कि किसे और क्यों वोट कर रहा है, उसे देखते हुए लोगों का झुकाव भाजपा के तरफ ही दिखाई दिया । 

कुछ क्षेत्रों का मतदान के दिन और बाद में जाकर जानकारी ली गई तो जो बात सामने आई उसमें कांग्रेस प्रत्याशी अमरपाल श्शर्मा के वजाय लोगों ने सुनील श्शर्मा पर ज्यादा भरोसा जताया । जिस खोडा पर अमरपाल श्शर्मा को सबसे ज्यादा भरोसा था वहां बसपा खेल बिगाड़ती नजर आ रही है । खोडा में इस बार बसपा का वोट प्रतिशत बढेगा, और यहां के बोट बंटने कारण ही अमरपाल श्शर्मा पर सुनील षर्मा भारी पड़ते नजर आ रहे हैं । कुछ और भी कालोनियों हैं जहां भाजपा दबदबा में रही है । एक अनुमान से देखा जा रहा है कि इस बार जीत का अंतर बहुत ही कम रहेगा । जब भी भाजपा के प्रत्याषी की हार हुई है चाहे वह लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा की, भाजपा के कार्यकर्ताओं की ही अहम भूमिका रही है । देखा जाए तो लोकसभा में रमेशचन्द्र तोमर और गाजियाबाद विधानसभा से बालेष्वर त्यागी की हार भी पार्टी कार्यकर्ताओं के कारण ही हुआ था । 2012 के चुनाव में साहिबाबाद विधानसभा सीट से सुनील षर्मा के हार का वजह भी मुख्यरूप से यही रहा । लेकिन इस बार भाजपा के कार्यकर्ताओं ने सुनील षर्मा का पूरा साथ दिया है, साथ ही पष्चिमी यूपी में मोदी का जादू भी अपना असर दिखाया है । कुछ जगहों जैसे षहीद नगर के कुछ बुथों पर भाजपा को पोलिंग एजेंट तक न मिलने की जानकारी मिली है, ऐसे में अमरपाल षर्मा भी कुछ इलाकों में मजबूत स्थिति में देखे गए है । बसपा प्रत्याषी जलालूद्दिन सिद्दकी किसी भी क्षेत्र में मुकाबले में नहीं दिखते हैं, लेकिन दूसरे की खेल बिगाड़ने में उनकी अहम भूमिका होगी ।   




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