केजरीवाल जी किसी और पर आरोप होता तब आप क्या करते? By मनोज झा What would you do if Kejriwal was in charge of someone else?



मनोज झा
मनमोहन सरकार के समय भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता के गुस्से को कैश कर 2012 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने वाले अरविंद केजरीवाल 5 साल आते-आते खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में फंस जाएंगे इसका अंदाजा किसी को नहीं था। दिल्ली की जिस जनता ने केजरीवाल पर आंख मूंदकर भरोसा किया..जिसने उन्हें ईमानदारी का मसीहा करार दिया...आज वो खुद सवालों के घेरे में हैं।

बच्चे की झूठी कसम खाने के बावजूद केजरीवाल जब कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तब भी लोगों का उन पर भरोसा बना रहा। पहली बार अपने 49 दिन के कार्यकाल में दिल्ली की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में पूरी रात सड़क पर बिस्तर लगाकर लेटे अपने मुख्यमंत्री को देख उनके विरोधी भी आपस में कहने लगे...भाई ये बंदा कुछ करेगा।

49 दिन के बुरे अनुभव के बाद केजरीवाल की पार्टी जब 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में आई तो हर किसी को लगा कि अब ये सरकार कुछ कर दिखाएगी। लेकिन लोगों का अंदाजा गलत निकला...केजरीवाल के एक-एक मंत्री बारी-बारी से विवादों में फंसते चले गए...कोई फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार हुआ..तो कोई रेप के आरोप में....किसी पर बिल्डर से वसूली के आरोप लगे...तो किसी पर पत्नी से मारपीट का....हैरानी की बात ये रही कि इन मंत्रियों पर कार्रवाई तब हुई जब मीडिया ने दबाव बनाया।

आम आदमी पार्टी के किसी नेता पर जब भी सवाल उठते केजरीवाल और उनके लोग फौरन बचाव में उतर आते.. पार्टी के विधायकों को संसदीय सचिव बनाना हो या कुछ और केजरीवाल को हर जगह साजिश दिखने लगी...शायद केजरीवाल यहीं बड़ी गलती कर गए...प्रचंड बहुमत के घमंड में केजरीवाल और उनके करीबी नेता अपने उस आदर्श को भूल गए...जिसे लेकर उन्होंने पार्टी खड़ी की थी। भ्रष्टाचार पर बीजेपी, कांग्रेस से लेकर अंबानी-अदानी पर आरोप लगाने वाली आम आदमी पार्टी के नेताओं पर जब आरोप लगने लगे तो ऐसा लगा कि केजरीवाल को सांप सूंघ गया हो। सरकार में आने से पहले बात-बात पर दूसरी पार्टी के नेताओं की पोल खोलने वाले केजरीवाल अपने नेताओं को लेकर चुप्पी साधने लगे...मीडिया सवाल पूछता और वो मुंह घुमाकर चल देते...जब उन्हें लगा कि अब चुप रहना ठीक नहीं तो फिर वो ट्विटर का सहारा लेने लगे।

केजरीवाल को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका ग्राफ धीरे-धीरे नीचे गिरता जा रहा है और जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पार्टी को पंजाब में करारी हार मिली...गोवा में 39 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई...रही सही कसर एमसीडी के चुनाव नतीजों ने पूरी कर दी।

लेकिन केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ा सदम तब लगा...जब उन्हीं की सरकार में मंत्री रहे दो-दो लोगों ने केजरीवाल को भ्रष्ट बता डाला...पहले कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से 2 करोड़ कैश लेने का आरोप लगाया ...फिर आसिम अहमद खान ने ये कहकर भूचाल ला दिया कि केजरीवाल ने उनसे 5 करोड़ रुपए मांगे थे। केजरीवाल के दोनों पूर्व मंत्रियों ने उनके खिलाफ सबूत होने का दावा किया...और तो और कपिल मिश्रा ने सरकारी गवाह बनने की भी बात कर डाली।

हैरानी की बात ये है कि केजरीवाल पर ये संगीन इल्जाम किसी और ने नहीं उन्हीं की सरकार में मंत्री रहे लोगों ने लगाया...बीजेपी और कांग्रेस ने जब केजरीवाल का इस्तीफा मांगा तो अपनी आदत के मुताबिक आम आदमी पार्टी ने दोनों पूर्व मंत्रियों को झूठा करार दे डाला। एक हफ्ते पहले तक केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा को आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और मोदी का एजेंट बता डाला और तो और पार्टी के नेता संजय सिंह यहां तक बोल गए कि कपिल मिश्रा अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं।

केजरीवाल और आम आदमी पार्टी भले ही भूल जाएं...लेकिन दिल्ली की जनता को केजरीवाल का रामलीला मैदान में शपथग्रहण के समय दिया भाषण याद है...केजरीवाल जी आज दिल्ली के साथ देश की जनता आपसे एक ही सवाल कर रही है...अपने भाषण की सीडी देखो और फिर दिल पर हाथ रख कर बताओ....अगर ये आरोप किसी और पर लगता तो आप क्या करते? आप भ्रष्टाचार का हवाला देकर पहले इस्तीफा मांगते और फिर जांच के लिए तैयार होते....केजरीवाल जी जनता को समझने में देर लग सकती है लेकिन वो दूसरी बार भूल नहीं करती।

मनोज झा
(लेखक टीवी चैनल में वरिष्ठ पत्रकार हैं)




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