रोहिंग्या मुस्लिमों के विस्थापित होने के बीच म्यांमार की सेना पर बारूदी सुरंग बिछाने का आरोप - myanmar military deploy landmines in near bangladesh border for rohingya muslims refugee amnesty





कॉक्स बाजार (बांग्लादेश): म्यांमार के पश्चिमी रखाइन प्रांत में हिंसा प्रभावित रोहिंग्या मुस्लिमों के विस्थापित होने के बीच म्यांमार की सेना पर बारूदी सुरंग बिछाने का आरोप लगाया गया है. इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रविवार (10 सितंबर) को दो लोगों के घायल होने की बात कही. ऐसे कई मामलों सामने आए हैं जिसमें बांग्लादेश की सीमा पर बारूदी सुरंगों या अन्य विस्फोटकों से लोगों के घायल होने का पता चला है. बीते दो सप्ताह में रोहिंग्या समुदाय के करीब तीन लाख लोग विस्थापित होकर बांग्लादेश आए हैं.


बांग्लादेश में सीमा पर एपी के संवाददाताओं ने एक बुजुर्ग महिला को पैर की गंभीर चोट के साथ देखा जो संभवत: किसी विस्फोट के कारण घायल हुई थी. रिश्तेदारों का कहना है कि उसने बारूदी सुरंग पर पैर रख दिया था. अन्य भी इसी तरह के विस्फोट से घायल मिले. एमनेस्टी के अनुसार, म्यांमार उत्तर कोरिया और सीरिया सहित उन कुछ सेनाओं वाले देशों में शामिल है जिन्होंने हाल के वर्षों में खुलेआम बारूदी सुरंगों का प्रयोग किया है.


म्यांमार में रोहिंग्या चरमपंथियों ने तत्काल प्रभाव से एक महीने के एकपक्षीय संघर्षविराम की रविवार (10 सितंबर) को घोषणा की. म्यांमार में रोहिंग्या चरमपंथियों के खिलाफ सेना ने अभियान छेड़ रखा है जिसकी वजह से करीब तीन लाख रोहिंग्या भाग कर बांग्लादेश आ गये थे. इस एकपक्षीय संघर्षविराम का मकसद पलायन कर रहे लोगों तक सहायता पहुंचाना है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि रखाइन इलाके में 25 अगस्त को चरमपंथियों द्वारा म्यांमार के सुरक्षा बलों पर हमले और उसके बाद सेना के भारी पलटवार की वजह से 2 लाख 94 हजार मैले-कुचैले और थके हुये रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश पहुंच चुके हैं.


करीब एक पखवाड़े से बिना किसी ठिकाने, भोजन और पानी के रखाइन में रहने के बाद दसियों हजार लोग अब भी बांग्लादेश की तरफ बढ़ रहे हैं. सीमा के पास म्यांमार के सुरक्षा बलों द्वारा भगोड़ों को वापस आने से रोकने के लिये बिछाई गई बारूदी सुरंग की चपेट में आने से तीन रोहिंग्या के मारे जाने की खबर है.


मुख्यत: बौद्ध म्यांमार अपने मुस्लिम रोहिंग्या समुदाय को मान्यता नहीं देता और उन्हें ‘‘बंगाली’’ मानता है, जो अवैध रूप से बांग्लादेश से आये हैं. राज्य के उत्तरी हिस्सों के हिंसा की चपेट में आने के बाद करीब 27,000 रखाइन बौद्ध और हिंदू भी इलाके से पलायन कर गये. अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कहा, ‘‘अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी आक्रामक सैन्य अभियानों पर अस्थायी विराम की घोषणा करती है.’’ उसने बताया कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि प्रभावित क्षेत्र में मानवीय मदद पहुंचाई जा सके
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