नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI को बड़ा झटका लगा है. हाल ही में जारी हुए वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही के नतीजों में बैंक को 2416 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. 17 साल में ऐसा पहली बार है जब स्टेट बैंक को इतना बड़ा नुकसान हुआ. इस घाटे के पीछे सबसे बड़ा कारण बैड लोन है. बैड लोन यानी वो लोन होता है जो बैंक ने दिया लेकिन वो अब तक फंसा है और उसके वापस आने की उम्मीद कम है. बैड लोन में भारी इजाफा होने की वजह से ही बैंक को भारी-भरकम घाटा हुआ है. वहीं, बैंक को वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही में 2,610 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था.
तिमाही दर के आधार पर दिसंबर तिमाही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ग्रॉस एनपीए 9.83 फीसदी से बढ़कर 10.35 फीसदी पहुंच गया. वहीं, नेट एनपीए की बात करें तो यह भी 5.43 फीसदी से बढ़कर 5.61 फीसदी हो गया. मतलब अगर फीसदी नहीं रुपए में बात करें तो बैंक का ग्रॉस एनपीए 1.86 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 1.99 लाख करोड़ रुपए हो गया. वहीं, नेट एनपीए 97,896 करोड़ रुपए से बढ़कर 1.02 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया.
17 साल में ऐसा पहली बार हुआ जब बैंक को इतना बड़ा घाटा हुआ. लेकिन, खास बात ये है कि एनपीए बढ़ने के बावजूद बैंक की प्रोविजनिंग घटी है. तीसरी तिमाही में एसबीआई की प्रोविजनिंग 19,137.4 करोड़ रुपए से घटकर 18,876 करोड़ रुपए रही है. वहीं, अगर ब्याज से आय की बात की जाए तो तीसरी तिमाही में 26.7 फीसदी बढ़कर 18,687.5 करोड़ रुपए रही.
बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार के मुताबिक, निश्चित ही तीसरी तिमाही के नतीजे निरशाजनक थे. लेकिन, उम्मीद है कि आने वाला समय अच्छा रहेगा. अप्रैल से बैंक सकारात्मक शुरुआत करेगा. दरअसल, तीसरी तिमाही में बैंक का 25,000 करोड़ रुपए का कर्ज एनपीए में डाल दिया गया.
इतनी बड़ी रकम को एनपीए में डालना तब होता है जब मुख्यतौर एनपीए के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई हो. साथ ही 23,330 करोड़ रुपए की पिछले वित्त वर्ष की राशि को लेकर भिन्नता होना भी बड़ी वजह है. यही कारण है कि बैंक का ग्रॉस एनपीए यानी कर्ज में फंसी संपत्तियां पिछले साल के 7.23 प्रतिशत से बढ़कर 10.35 प्रतिशत हो गई. ऐसा पहली बार है जब किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में इस तरह की भिन्नता सामने आई है. निजी क्षेत्र के बैंकों में यह एक सामान्य बात है.



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