शिवपाल और मुलायम के बीच आई दूरियां! क्या यही हैं संकेत Distance between Shivpal and Mulayam! Are these signs



लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी को एक सियासी स्थान देने वाले मुलायम सिंह यादव पार्टी से अलग-थलग पड़े हुए हैं और ऐसे में मुलायम को अपना सियासी गुरु मानने वाले शिवपाल अब सेक्युलर मोर्चा को संभाल रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक मुलायम चाहते हैं कि शिवपाल समाजवादी पार्टी के साथ बने रहें, लेकिन शिवपाल ने तो अब सेक्युलर मोर्चा को आगे ले जाने की ठान ली है।
शिवपाल ने बीते दिनों यहां तक कह दिया कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बिना सेक्युलर मोर्चा के समर्थन के किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बन सकती है। ऐसे में विशेषज्ञ इस बयान को अखिलेश से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी के लिए खतरा करार दे रहे हैं और उनका यह भी मानना है कि उत्तर प्रदेश के महागठबंधन को यह मोर्चा ध्वस्त कर देगा और इसका फायदा बीजेपी को मिलेगा। 

सूत्रों की मानें तो बीते मंगलवार को शिवपाल ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की और डेढ़ साल से पार्टी से अलग-थलग पड़े रहने पर अपना दुख जाहिर किया। लेकिन, मुलायम सिंह चाहते हैं कि वह पार्टी से दूर न हों। बता दें कि मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी शिवपाल ने सारे राजनैतिक दांव-पेंच उन्हीं से सीखे हैं। ऐसे में सपा के संस्थापक मुलायम को इस बात का भय तो जरूर सता रहा होगा कि शिवपाल का मोर्चा उनके सालों की मेहनत को ध्वस्त न कर दे।

विशेषज्ञ बताते हैं कि समाजवादी पार्टी को शिवपाल और मुलायम सिंह यादव ने मिलकर खड़ा किया है। आज जो भी सपा के नेता बड़ी-बड़ी गाड़ियों और बंगलों में रहते हैं वह सब इन्हीं नेताओं की देन है। क्योंकि, पार्टी के दोनों कद्दावर नेताओं ने साइकिल से गांव-गांव जाकर पार्टी का प्रचार-प्रसार और पार्टी के प्रति लोगों का विश्वास हासिल किया था। लेकिन, आज पार्टी खुद तीन टुकड़ों में बंटती हुई दिखाई दे रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को बर्खास्त किए जाने के बाद से पार्टी में विवाद शुरू हो गया था। जिसके बाद पिता मुलायम सिंह यादव ने प्रजापति को दोबारा उनके पद पर बहाल करने के लिए अखिलेश पर दबाव बनाया। दबाव इतना बढ़ गया कि पिता और बेटे के बीच की दूरियां बढ़ने लगीं और दोनों ने खासा सुर्खियां भी बटोरीं। इस विवाद को उस वक्त तूल मिल गया जब अखिलेश ने अतीक अहमद का टिकट काट दिया। इससे पार्टी के कई कद्दावर नेता नाराज हो गए और पार्टी दो धड़ों में बंट गई।

एक धड़ा अखिलेश और रामगोपाल यादव का तो दूसरा धड़ा शिवपाल और मुलायम सिंह के नाम से उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाना-जाने लगा। जिसकी वजह से सपा का यादव वोट बैंक भी बंट गया और इसका फायदा 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिला। अब पार्टी तीसरे धड़े में बंटती हुई दिखाई दे रही है... तीसरा धड़ा इसलिए क्योंकि शिवपाल अब अपने सियासी गुरु से दूरी बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, शिवपाल ने बीते दिनों यह स्पष्ट किया था कि समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन मुलायम सिंह यादव के आशीर्वाद से किया गया है। 

राजनैतिक जानकारों का मनना है कि शिवपाल सेक्युलर मोर्चा को मजबूत करने से ज्यादा समाजवादी पार्टी को कमजोर करने में लगे हुए हैं। इसीलिए वह हर बार जिक्र करते हैं कि सेक्युलर मोर्चा सपा से उपेक्षित नेताओं के लिए बनाया गया है ताकी उनको उनका सम्मान वापस मिल सके। शिवपाल के करीबी लोगों का मनना है कि शिवपाल आने वाले लोकसभा चुनाव में सपा के साथ जिनका गठबंधन होगा उस वक्त गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं, जिससे सपा को खासा नुकसान हो सकता है। फिलहाल, अब देखना यह बाकी है कि क्या मुलायम सिंह यादव अपने छोटे भाई और पार्टी की साख बनाने वाले शिवपाल से किनारा कर लेते हैं। या फिर उन्हें मोर्चा को मजबूत करने का आशीर्वाद देते हुए दिखाई देंगे। 




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