पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में सभी सातों दोषी 27 साल से जेल में बंद
चेन्नई. तमिलनाडु कैबिनेट ने रविवार को राजीव गांधी के सभी 7 हत्यारों को रिहा करने की सिफारिश करने का फैसला किया है। राज्य सरकार जल्द ही यह प्रस्ताव राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित के पास भेजेगी। तमिलनाडु सरकार में मंत्री डी जयकुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में सातों दोषी पिछले 27 साल से जेल में बंद हैं। 2014 में तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने सभी दोषियों को रिहा करने का फैसला किया था, लेकिन केंद्र ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर विरोध जताया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल से राजीव गांधी की हत्या में दोषी ए जी पेरारिवलन की दया याचिका पर विचार करने को कहा था। इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राजीव गांधी के हत्यारों की सजा कम करने से खतरनाक नजीर बनेगी। इसका अंतरराष्ट्रीय असर भी नहीं होगा।
पेरारिवलन की मां ने सरकार को शुक्रिया कहा : पेरारिवलन की मां ने बताया, "मैंने आज मुख्यमंत्री से मुलाकात की, उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि राज्यपाल सभी दोषियों को रिहा करने की हमारी मांग को जरूर स्वीकार करेंगे। सभी लोग जल्द से जल्द रिहा हो जाएंगे। हम सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं, जिसने रिहाई के लिए रास्ता निकाला।"
21 मई 1991 को हुई थी राजीव गांधी की हत्या: राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी। हमलावर की पहचान धनु के रूप में हुई थी। धमाके में धनु समेत 14 लोगों की मौत हुई थी। इस हत्याकांड के सातों दोषी- पेरारिवलन , मुरुगन, शंतन, रॉबर्ट पायस, नलिनी, जय कुमार और रविचंद्रन जेल में हैं। जेल में बंद पेरारीवलन ने संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के पास दया याचिका दायर की है।



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