गाजियाबाद, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो ) असलहों के लाइसेंस पर लगी रोक हटते ही पिस्टल की मांग बढ़ गई है। कलेक्ट्रेट में एक पखवाड़े में जमा हुए आवेदनों में पचास फीसदी प्रार्थना पत्र पिस्टल के हैं। हालांकि रिवाल्वर व राइफल को भी लोगों ने आवेदन किया है पर इनकी संख्या गिनती में होने से इसका क्रेज घटा है।
आयुध लिपिक के यहां अब तक दो सौ प्रार्थना पत्र आ चुके हैं। प्रार्थना पत्रों में निरन्तर बृद्धि हो रही है। कोर्ट ने असलहा लाइसेंस पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया था। इससे इसके शौकीनों में मायूसी छा गई थी। आवेदन तो आ रहे थे पर प्रशासन कोर्ट का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ ले रहा था। पिछले दो वर्षों में लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी। बीते दिनों में कोर्ट ने मानक तय करते हुए लाइसेंस को पुनः अनुमति प्रदान कर दी। विभिन्न पहलुओं मसलन लाइसेंस की आवश्यकता और कारण की जांच पड़ताल के बाद ही जिला प्रशासन लाइसेंस की अनुमति प्रदान करेगा। रोक हटते ही खासकर युवाओं में लाइसेंस बनवाने की होड़ लग गई है। असलहों के शौकीन रिज कलेक्ट्रेट का चक्कर लगा जुगाड़ खोज रहे हैं ताकि उनका लाइसेंस स्वीकृत हो जाए।
प्रार्थना पत्र के साथ आवेदक को आधार कार्ड, हाईस्कूल की मार्कशीट व निवास प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी लगाना अनिवार्य है। इसके साथ ही हलफनामा भी दाखिल करना है। आयुध प्रभारी के यहां प्रार्थना पत्र देने के बाद जांच को सम्बंधित थाने को भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से लाइसेंस की अनुमति प्रदान की जाएगी। जिम्मेदार कर्मियों की माने तो अब तक दो सौ आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमे पचास फीसदी पिस्टल के हैं।



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