- 13-पॉइंट रोस्टर के खिलाफ और आदिवासी अधिकारों के लिए ‘भारत बंद’ के आह्वान का भी किया समर्थन
- 200-पॉइंट रोस्टर को बहाल करने की शिक्षकों की मांग का किया पुरजोर समर्थन
ज्ञात हो कि 13-पॉइंट रोस्टर प्रणाली से सार्वजनिक उच्च शिक्षण संस्थानों मे शिक्षकों की भर्ती के लिए आरक्षित सीटों पर बहुत ही खराब असर पड़ेगा| इससे पहले उच्च शिक्षण संस्थानों मे 200-पॉइंट रोस्टर प्रणाली के तहत अध्यापकों की भर्ती होती थी, जिसमे विश्वविद्यालय एवं कालेजों को एक इकाई के तौर पर माना जाता था| मगर, इसके विपरीत यूजीसी द्वारा जारी हालिया नियम के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के आरक्षण के लिए अब विभागों को एक इकाई के तौर पर माना जाएगा| इस प्रणाली के तहत सिर्फ उन्ही विभागों मे आरक्षण लागू होगा, जहाँ 14 से ज्यादा शिक्षक होंगे| इस रोस्टर प्रणाली से दलित, आदिवासी एवं पिछड़े समुदायों से आने वाले लोगों की उच्च शिक्षा के क्षेत्र मे हिस्सेदारी मे भारी कटौती होगी जिससे उनका उच्च शिक्षा मे प्रतिनिधित्व मे कमी आएगी| साथ ही, इस प्रणाली से संविधान द्वारा अनिवार्य किए गए आरक्षण नियमों का उल्लंघन होगा|
रैली में सर्वोच्च न्यायालय के 13 फरवरी के आदेश का भी मुद्दा उठाया गया जिसके तहत 16 राज्यों को करीब 11 लाख आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल किया जाना था| अब इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गयी है| यह आदेश उस समय आया है जब देश के संसाधनों को सरकार द्वारा कॉर्पोरेट घरानों को लूटने की पूरी आज़ादी दी जा रही है| आदिवासियों को उनके अधिकारों और जमीन से बेदखल करने के पीछे सरकार द्वारा अनेक नीतियाँ बनाई जा रही हैं| यह आदेश भी इसी लिए पारित हो पाया क्योंकि सरकार द्वारा बचाव पक्ष लचर था| आज देश में सरकार की नीतियों के कारण गरीबी में भारी बढ़ोत्तरी हुई है| इसी संदर्भ में आदिवासियों की ज़मीन और रोजगार छीनकर सरकार उन्हें शहरों में आने को मजबूर कर रही है जहां वो सबसे अर्थव्यवस्था के सबसे निचले पायदान के मजदूर बनने को मजबूर होंगे|
केवाईएस 13-पॉइंट रोस्टर प्रणाली का विरोध करता है और केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाकर 200-पॉइंट रोस्टर को बहाल करने की मांग करता है| साथ ही, केवाईएस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का स्वागत करता है और यह मांग करता है कि पूंजीपति घरानों द्वारा देश के संसाधनों के अवैध दोहन को रोकने के लिए सख्त कानून बनाये जाए| केवाईएस आने वाले दिनों मे इस अनुचित नियम के खिलाफ डूटा के अभियानों और संघर्ष का समर्थन करेगा|


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