जींद, (भाषा) राजस्व विभाग के रिकार्ड की खामी की वजह से एक किसान की अधिग्रहित की गई एक मरला जमीन का मुआवजा किसी दूसरे को दे दिया गया। अब आठ साल बाद जाकर अधिकारियों ने अपनी गलती मानी है और जल्द मुआवजा दिलाने की बात कही है।
जींद जिले के गांव रामराये के थाम्बू ने बताया कि 2008 में भिवानी रोड और ईक्कस के बीच में बाईपास के लिए जमीनें अधिग्रहित की गई थी, उनमें उसकी जमीन का हिस्सा भी शामिल था। उसके पिता हजुरदीन के नाम सात कनाल 14 मरले जमीन थी। बाईपास के लिए तो विभाग ने उनकी 10 मरले अधिग्रहित करने की सूचना देने के साथ मुआवजा दे दिया। बाद में पता चला कि विभाग ने उसकी जमीन में से 1 कनाल 10 मरले जमीन अधिग्रहित की है और उसकी 1 कनाल जमीन का मुआवजा किसी ओर को दे दिया है। थांबु ने बताया कि बार-बार गुहार के बाद राजस्व विभाग के जींद तहसीलदार ने निशानदेही के लिए निर्देश दिए। इन निर्देशों के बाद भी विभाग के पटवारी निशानदेही करने से साफ मना करते रहे। उसके बार-बार कहने पर निशानदेही की गई तो निशानदेही की रिपोर्ट में पटवारी ने में माना गया कि गलती से थाम्बू की 1 कनाल की राशि किसी ओर को दे दी गई है।
इस बीच, पीडब्ल्यूडी विभाग के तहसीलदार धर्मबीर ने कहा कि रेवेन्यू रिकार्ड में खामी थी। इसलिए किसान थाम्बू की 1 कनाल जमीन का मुआवजा किसी ओर को दे दिया गया। अब रिकार्ड को ठीक करवाया जाएगा। जैसे ही कोर्ट के निर्देश आएंगे, थाम्बू को उसका हक दिलवा दिया जाएगा।



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