नेफिस सेमिनार में इरोम शर्मीला ने ‘आफ्सपा और जन-आन्दोलन’ पर रखा अपना वक्तव्य! Nefis seminar Irom Sharmila 'AFSPA and the mass movement' put on your statement!




  • नेफिस ने मनाई इराबोत की 120वीं सालगिरह! आफ्सपा विरोधी-संघर्ष को जन-आन्दोलन बनाने की ली शपथ

नई दिल्ली, ( संवाददाता )  नार्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (नेफिस) ने आज दिल्ली समाज कार्य विद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय पर ‘आफ्सपा और जन-आन्दोलन’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया| इसमें मानवाधिकार कार्यकर्त्ता, इरोम शर्मीला को बतौर मुख्य वक्ता आमंत्रित किया गया था| इस सेमिनार का आयोजन क्रांतिकारी नेता, हिजाम इराबोत की 120वीं सालगिरह पर किया गया था| चिन्गलेन खुमुकचम, संयोजक, नेफिस ने अपने स्वागत भाषण में इस बात पर जोर दिया कि इराबोत के संघर्ष से प्रेरित होकर हमें जनतांत्रिक, प्रगतिशील आन्दोलन खड़ा करना होगा और कि इसी उद्देश्य से सेमिनार का आयोजन किया गया था|

ज्ञात हो कि अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के बाद, मणिपुर के बाहर इरोम शर्मीला ने पहली बार अपना भाषण रखा है| अपने भाषण में उन्होंने एक बड़े जन-आन्दोलन की नींव तैयार करने पर जोर दिया| उन्होंने कहा की अपनी भूख हड़ताल खत्म कर, चुनावी राजनीति में आने के उनके हालिया फैसले का कारण है की आफ्सपा-विरोधी संघर्ष को व्यक्ति-केन्द्रित संघर्ष से बदलकर एक जन-आन्दोलन का रूप देना|
महिला अधिकार कार्यकर्त्ता, डॉ. माया जॉन ने विभिन्न जन-आन्दोलनों को जोड़ने और एक दूसरे के संघर्षों को समर्थन देने की ज़रुरत को चिन्हित किया| प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जो इस सेमिनार में एक वक्ता थीं, ने इस सेमिनार का स्वागत कर कहा कि जन-आन्दोलनों की एकता से ही यह सुनिश्चित होगा कि आन्दोलन के रास्ते हमेशा वृहद् रहेंगे|
सेमीनार में मणिपुर से ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व से छात्रों ने शिरकत किया| उनमें लौह-महिला, इरोम शर्मीला से मिलने को लेकर काफी उत्सुकता दिखी| उनकी उत्सुकता से प्रदर्शित हुआ कि आफ्सपा-विरोधी आन्दोलन आने वाले दिनों में एक बड़े आन्दोलन का रूप लेगा|
चिंगलेन खुमुकचम ने अपने समापन भाषण में मुख्य वक्ताओं और श्रोताओं का धन्यवाद किया| साथ ही उन्होंने इस मौके को पिछले संघर्षों का मौजूदा जन-आन्दोलन के साथ मिलन-स्थल बताया| उन्होंने कहा की इस मौके पर हमें इराबोत के जनतांत्रिक आन्दोलन तैयार करने के संघर्ष को याद कर, सभी तरह के शोषण, उत्पीड़न और दमन का विरोध करना होगा
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