लखनऊ. ( न्यूज नेटवर्क ) मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाराजगी के बावजूद गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया है। गुरुवार को यह जानकारी यूपी के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने दी। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सलाह से यह फैसला लिया गया है। कुछ महीने पहले भी मुख्तार की पार्टी का सपा में विलय हुआ था लेकिन तब अखिलेश ने साफ कहा था कि सरकार अपने काम के दम पर इलेक्शन जीत सकती है, उसे इस तरह के लोगों की जरूरत नहीं है।
बता दें, कौमी एकता दल का इस साल 21 जून को समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव ने विलय कराया था। हालांकि, उस समय पार्टी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी सपा में शामिल नहीं हुए थे। उस समय कहा गया था कि अखिलेश यादव इस विलय के पक्ष में नहीं थे। कौमी एकता दल के सपा में विलय के बाद मुलायम सिंह यादव के परिवार में विवाद भी हो गया था। इस फैसले से नाराज अखिलेश यादव को मनाने के लिए शिवपाल यादव उनके घर पहुंचे थे। इसके बाद मुलायम भी बेटे अखिलेश के फैसले से नाराज हो गए थे। लेकिन अखिलेश ने पार्टी इमेज को देखते हुए कौमी एकता दल से किनारा कर लिया था और पार्टी ने विलय को रद्द कर दिया था।
शिवपाल ने कहा था- मुख्तार नहीं, अफजाल की पार्टी है कौमी एकता दल शिवपाल ने कहा था, ''हमने पार्टी के विलय में केवल अफजाल अंसारी और उनके भाई सिगबतुल्ला अंसारी को शामिल किया है, न कि मुख्तार अंसारी को।'' ''सपा और कौमी एकता दल के विलय पर उन्होंने कहा कि कौमी एकता दल मुख्तार की पार्टी नहीं है। पार्टी के प्रेसिडेंट अफजाल अंसारी हैं।'' सीएम की नाराजगी पर शिवपाल ने कहा, ''पार्टी में सब कुछ ठीक चल रहा है। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है।''
''नेताजी पार्टी के सर्वेसर्वा हैं और उनका फैसला ही अंतिम है। सपा लोकतांत्रिक पार्टी है, पार्टी में सभी को अपनी बात रखने का हक है।''
निर्दलीय जीतते आए हैं मुख्तार अंसारी
बता दें, मऊ सदर से बाहुबली मुख्तार अंसारी साल 1996 में मऊ सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे।
साल 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में भी निर्दल प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की। साल 2012 के चुनाव के पूर्व मुख्तार ने कौमी एकता दल का गठन किया। कौमी एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्तार के बड़े भाई पूर्व सांसद अफजाल अंसारी हैं।



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