पटना: राजगीर में जदयू के अधिवेशन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा पाटीदारों (पटेल), मराठाें, गुर्जरों और जाटों के आंदोलनों को समर्थन देने का असर दिखने लगा है. पाटीदार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हार्दिक पटेल, मराठा क्रांति मोरचा के संयोजक ब्रिगेडियर सुधीर सामंत, जाट महासभा के डाॅ यदुवीर सिंह और राजस्थान गुर्जर आंदोलन के संयोजक हिम्मत सिंह ने नीतीश कुमार के उस बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने पाटीदार, गुर्जर, मराठा और जाट समाज के आरक्षण आंदोलनों का समर्थन किया है.
हार्दिक पटेल ने नीतीश कुमार को गुजरात आने का न्योता दिया है. मराठा क्रांति मोरचा, गुर्जर आंदोलन और जाट महसभा ने भी नीतीश कुमार को अपने-अपने प्रदेश में आमंत्रित किया है और उनके नेतृत्व में आस्था प्रकट करते हुए अभिनंदन करने का प्रस्ताव दिया है.हार्दिक पटेल ने मुख्यमंत्री के नाम भेजे अपने पत्र में कहा कि हमारा समाज गुजरात में पाटीदार, महाराष्ट्र में मराठा, राजस्थान में गुर्जर और दक्षिण भारत में कापू कम्मा रेड्डी के नाम से जाना जाता है. हमारा समाज आरक्षण के अपने संवैधानिक अधिकार की मांग कर रहा है. आपने हमारी मांग का समर्थन किया है, इसलिए आप गुजरात आएं, हम आपका अभिनंदन करना चाहते हैं. इसी प्रकार का अनुरोध मराठा क्रांति मोरचा, गुर्जर सभा और जाट महासभा ने भी किया है. जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि गुर्जर और जाट महासभा के संयोजक ने फोन पर उनसे बात की है और जदयू अध्यक्ष के आगमन की तिथि तय करने का अनुरोध किया है.
राजगीर अधिवेशन में जदयू ने अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प खड़ा करने के लिए देश भर में गैरभाजपा दलों को एकजुट करने के लिए अधिकृत किया है. गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने राजगीर अधिवेशन में किसानों की समस्या का जिक्र करते हुए कहा था कि खेती-किसानी से जुड़े पाटीदार, गुर्जर, मराठा और जाट अब आरंक्षण की मांग कर रहे हैं. आमतौर पर यह वर्ग मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है, लेकिन अब इनकी माली हालत खराब हो गयी है.



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