पुस्तक मेले में महिला लेखिकाओं का प्रभाव The impact of women writers in the book fair



नई दिल्ली,  ( संवाददाता )  विश्व पुस्तक मेला-2017 में महिला लेखन की जोरदार झलक देखने को मिल रही है। मानुषी थीम पर आयोजित पुस्तक मेले में महिला लेखिकाओं और महिला मुद्दों पर लिखी 600 से ज्यादा पुस्तकों का प्रदर्शन थीम पैवेलियन में किया गया है।

प्रगति मैदान में शनिवार को मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेन्द्र नाथ पांडे ने पुस्तक मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने पुस्तक मेले का विषय मानुषी यानी महिला लेखन रखे जाने की भी सराहना की। महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर क्षोभ व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य उनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इस मौके पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ ओड़िया लेखिका प्रतिभा राय ने कहा कि पुरुष और नारी लेखन को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए। एनबीटी के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि वैदिक काल से ही विदुषियों की एक समृद्ध और सुदीर्घ परंपरा रही है। इसी परंपरा को पुस्तक मेले में मानुषी विषय के अंतर्गत प्रदर्शित किया गया है।

कब से कब तक, मेले से जुड़ी सभी जानकारियां

7 से 15 जनवरी तक चलेगा मेला।
स्कूल यूनीफार्म में आने वाले बच्चों को मुफ्त प्रवेश।
सुबह 11 से रात 8 बजे तक।
टिकट की कीमत: वयस्क के लिए 30 रुपये बच्चे के लिए 20 रुपये’ बाल व शैक्षणिक पुस्तकें हॉल 14 और 18 मिलेंगी

महिला लेखिकाओं के योगदान को प्रदर्शित करते हुए पुस्तक मेले में मानुषी मंडप बनाया गया है। इसमें अलग-अलग कालखंडों व भाषाओं में विशेष योगदान करने वाली महिलाओं का परिचय लोगों के समक्ष रखा गया है। 12 विदुषियों का कैलेंडर भी मेले की आयोजक संस्था नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा जारी किया गया है। थीम पैवेलियन में महिला मुद्दों व लेखन से संबंधित सेमिनार, विचार-विमर्श सत्र दिनभर चलते रहेंगे।

कार्यक्रम

हॉल 12, 12ए, लेखक मंच, सामयिक संवाद कार्यक्रम। वरिष्ठ साहित्यकार चित्र मुद्गल अपने उपन्यास का पाठ करेंगी,12.45 से 2 बजे तक।’ हॉल नंबर 12, नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा वीरगाथा पर कार्यक्रम, शाम 4.15 से 5.45 बजे।’ हॉल नंबर 8, लेखक मंच, एनबीटी की पुस्तक ढब्बूजी का धमाल का विमोचन, शाम 6 बजे।’ हॉल संख्या-14, बाल मंडप, कविता कार्यक्रम अंधेरे से उजाले की ओर, 11.30 बजे से।

पुस्तक मेले का इंतजार सबको रहता है। छुट्टी का दिन होने के चलते हम पूरे परिवार के साथ पुस्तक मेले में आ गए। यहां बच्चों के लिए भी अच्छी किताबें मिल जाती हैं। -डॉ. राजकुमार, शिक्षक मैं हर वर्ष मेले में आती हूं। यहां मुझे हर तरह की किताबें मिल जाती हैं।

यहां तक कि चिकित्सा और शरीर विज्ञान से जुड़ी कई किताबें भी। -शुभांगिनी बनर्जी, चिकित्सकरचनात्मक क्षेत्र में हो रही नई खोज के बारे में जानना मेरे काम का हिस्सा है। पुस्तक मेले से इसमें काफी मदद मिलती है। -वरुण पाराशर, क्रिएटिव डायरेक्टर



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