यूजीसी के दिशा-निर्देश के खिलाफ एसओएल छात्रो का प्रदर्शन SOL students demonstrated against the UGC guidelines



डिग्री पर ‘शिक्षा प्राप्त करने के तरीके’ का उल्लेख अनिवार्य करने वाले  दिशा-निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई!

( नई दिल्ली, विषेष संवाददाता ) सैकड़ो की संख्या में आज दिल्ली विश्विद्यालय के मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) के छात्रो ने विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के खिलाफ प्रदर्शन किया| छात्र यूजीसी द्वारा दिए गए उस दिशा निदेश को रद्द करने की मांग कर रहे थे जिसके तहत उनके शिक्षा प्राप्त करने का माध्यम यानी ‘कॉरेस्पोंडेंस’ का उल्लेख करना ज़रूरी होगा| ज्ञात हो कि यह आदेश 31 अक्टूबर, 2016 को यूजीसी द्वारा जारी पत्र संख्या D.O.F.No.2-6/2016(DEB-lll) में सभी विश्विद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करते हुए दिया गया था| यूजीसी के अनुसार ऐसा ‘परम्परागत’ तथा ‘कॉरेस्पोंडेंस’ कोर्सों की डिग्री में भेद करने के लिए किया गया है| ज्ञात हो कि जिन विश्वविद्यालयों में कॉरेस्पोंडेंस और परम्परागत दोनों माध्यमों से पढ़ाई होती है, वहाँ सभी छात्रों को एक ही सिलेबस पढ़ाया जाता है और उनकी परीक्षा भी एक ही विश्वविद्यालय के विभाग द्वारा करवाई जाती है| परीक्षा में अंक छात्रों की योग्यता अनुसार ही दिए जाते है| ऐसे में पहले कभी भी यूजीसी द्वारा यह कदम नहीं लिया गया क्योंकि एक ही तरह के प्रमाणों द्वारा प्राप्त डिग्रियों में भेद करने के लिए पहले कोई ज़रुरत नहीं समझी गयी थी|

यह दिशा-निर्देश इस बात की अनदेखी करते हैं कि जो छात्र पूरे देश में अलग-अलग मुक्त विश्विद्यालय से कॉरेस्पोंडेंस से पढाई कर रहे है, वो समाज के सबसे निचले तबके से आते है| ऐसे में यह निर्णय उन्हें पहले से ही अच्छी नौकरियों और अलग-अलग विश्विद्यालयों के रेगुलर स्नातकोत्तर कोर्सो में मिल रहे नाममात्र के अवसरों को और भी कम कर देगा क्योंकि शिक्षा के माध्यम का उल्लेख करने पर उनकी डिग्री को रेगुलर डिग्री से कमतर माना जाएगा| 2016 के दिशा निदेश के विपरीत यूजीसी ने पहले कई अवसरों पर विश्विद्यालयो को कॉरेस्पोंडेंस और रेगुलर डिग्रीयों को एक समान मानने के निर्देश दिए थे| परन्तु हालिया निर्देश यूजीसी के दोनों माध्यमों की डिग्री को समानता देने के मकसद को खत्म करने का काम करेगा|

छात्रो के एक प्रतिनिधिमंडल ने यूजीसी अधिकारियों को अपना ज्ञापन सौंपा और मांग किया कि तुरंत प्रभाव से ही 31 अक्टूबर, 2016 के निर्देश को वापस लिया जाये जिससे कॉरेस्पोंडेंस तथा रेगुलर डिग्रियों में समानता लायी जा सके| उन्होंने यह मांग भी उठाई कि और नए कालेजों और विश्वविद्यालयों का निर्माण किया जाये, जिससे समाज के इन निचले तबको से आने वाले छात्रो को रेगुलर कोर्सों में सीटें उपलब्ध हो सकें| सरकारी स्कूलों से आये छात्रों को विश्वविद्यालयों की प्रवेश-परीक्षा/कट-ऑफ में अक्षमता निवारण रियायत अंक (डेप्रीवेशन पॉइंट्स) दिए जाने की मांग को भी उठाया गया| छात्रो ने आने वाले दिनों में भेद-भाव के खिलाफ अपने संघर्ष को और तीव्र करने का प्रण लिया|





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