तीन महीने से काकोरी पुलिस को आतंकियों के बारे में थी जानकारी, 27 मार्च को बम ब्लास्ट करनेवाले थे आतंकि - ISIS lucknow terrorist encounter uttar pradesh



यूपी एटीएस ने यदि समय रहते खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के नेटवर्क को नेस्तनाबूत नहीं किया होता, तो इसका खामियाजा पूरे उत्तर प्रदेश को उठाना पड़ता. जी हां, आईएसआईएस के इन आतंकियों की साजिश पूरे यूपी को दहलाने की थी. यह खुलासा हुआ है कि आईएसआईएस खुरासान मॉड्यूल द्वारा यूपी के बाराबंकी के एक कस्बे में 27 मार्च को बम ब्लास्ट की योजना में था, जिसे भोपाल ट्रेन ब्लास्ट के बाद विफल कर दिया गया.

एडीजी (कानून और व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी ने बताया कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल के छह संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. भोपाल-उज्जैन पैसेंजर में बम ब्लास्ट की साजिश कानपुर के जाजमऊ इलाके के रहने वाले सैफुल्लाह ने रची थी. इसके लिए लखनऊ के काकोरी के हाजी कॉलोनी में किराए का मकान लेकर तैयारी की गई. यह वही जगह है, जहां मंगलवार 11 घंटे एनकाउंटर चला है.


दैनिक जागरण के मुताबिक, इस साजिश में सैफुल्लाह के अलावा कानपुर केएडीए कॉलोनी निवासी दानिश अख्तर उर्फ जफर, अलीगढ़ के इन्द्रानगर निवासी सैयद मीर हुसैन उर्फ हम्जा और कानपुर के जाजमऊ निवासी आतिश मुजफ्फर के अलावा कुछ अन्य सदस्य भी शामिल थे. सैफुल्लाह और एक साथी को छोड़ यही तीनों मध्य प्रदेश ब्लास्ट ऑपरेशन में गए थे. ब्लास्ट के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने तीनों को पिपरिया से गिरफ्तार कर लिया था.

यूपी एटीएस और आईएसआईएस आतंकियों की मुठभेड़ के दौरान एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि तीन महीने से काकोरी पुलिस को आतंकियों के बारे में जानकारी थी. इस बारे में एक स्थानीय युवक ने पुलिस को जानकारी दी थी. इसके बावजूद लखनऊ पुलिस ने आतंकियों का सत्यापन नहीं कराया. आतंकी लखनऊ के हाजी कॉलोनी स्थित मकान में तीन महीने से किराए पर रह रहे थे. तीनों की जानकारी के बाद भी पुलिस ने उनका सत्यापन नहीं कराया था.


हाजी कॉलोनी में पड़ोस में रहने वाले अकरम ने बताया कि करीब तीन महीने से तीनों आतंकी मकान में किराये पर रह रहे थे. इनका अक्सर देर रात मकान में आना होता था और तड़के ही चले जाते थे. ये लोग बड़े-बड़े भरे हुए बैग भी अपने साथ लेकर आते थे. आस-पड़ोस के लोगों से उनका कोई तालमेल भी नहीं था. तीनों लड़के एक ही कमरे में रहते थे. देर रात तक इनके कमरों की लाइट भी जलती रहती थी. इनकी गतिविधियां शुरू से ही संदिग्ध थीं.

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