CM को हराने के लिए सड़कों पर मारे मारे फिर रहे PM! By डॉ. वेदप्रताप वैदिक Then wander the streets to defeat CM PM!




 डॉ. वेदप्रताप वैदिक
उत्तर प्रदेश का चुनाव राष्ट्रीय चुनाव से भी ज्यादा महत्वपूर्ण बन गया है। ऐसा चुनाव भारत में पहले शायद कभी हुआ ही नहीं। क्या आपने कभी ऐसा देखा या सुना कि किसी मुख्यमंत्री को हराने के लिए कोई प्रधानमंत्री मारा-मारा फिर रहा हो, सड़कों पर नौटंकी कर रहा हो, छोटे-मोटे विधानसभा-क्षेत्रों में भीड़ जुटाने की कोशिश कर रहा हो और टीवी चैनलों और अखबारों को पटाने के लिए सभी पैंतरे आजमा रहा हो? यह सब क्यों हो रहा है? क्योंकि मुख्यमंत्री अखिलेश ने आपका दम फुला रखा है। आप सिर्फ विकास के वादे करते हैं जबकि वह विकास करता है। आप सिर्फ बातें करते हैं, वह काम करता है। आप प्रधानमंत्री की गरिमा को ताक पर रखकर अखिलेश पर कीचड़ उछालते हैं और वह नौजवान मुख्यमंत्री आप पर गुलाब की ऐसी पंखड़ियां मारता है कि उसके कांटे आपको लहू-लुहान कर देते हैं। आपने इसे भाजपा और सपा की टक्कर की बजाय अखिलेश और मोदी की टक्कर बना दिया है। समाजवादी पार्टी की जगह अखिलेश ही अखिलेश है। अखिलेश के अलावा कोई नेता कहीं दिखाई नहीं पड़ता।

इधर हमारे मोदीजी के अलावा सभी भाजपा नेता नदारद हैं। यदि उधर मुलायम सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, शिवपाल और रामगोपाल भी गोल हैं तो इधर आडवाणीजी, जोशीजी, राजनाथ, सुषमा, गडकरी- सभी गायब हैं। बस मोदी ही मोदी है। वाह, क्या लोकतांत्रिक चुनाव है, यह? यह लोकतांत्रिक है या एकतांत्रिक? इस चुनाव में मोदी हारे या जीतें, जो भी हो, हर हाल में देश का भला है। यदि मोदी को हारना पड़ा तो उनको सबक लेना ही पड़ेगा। उन्हें किसी के मार्गदर्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे खुद समझ जाएंगे कि बंडी बदल-बदलकर बंडल मारने से काम नहीं चलेगा। भाजपा के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। संघ की हिम्मत लौटेगी और हवा में उड़ रही मोदी की बुलेट ट्रेन पटरी पर आ जाएगी।

यदि उत्तर प्रदेश में मोदी की जीत हो गई तो यह चमत्कार मोदी में 2014 से भी ज्यादा हवा भर देगा। मोदी नामक यह गुब्बारा इतना फूल जाएगा कि वह जमीन पर टिक ही नहीं पाएगा। अहंकार आसमान छुएगा। एहसान फरामोशी गरजेगी। 56 इंच का सीना फुलकर 65 इंच का हो जाएगा। सारे विरोधी डर जाएंगे। यह डर उन्हें एक कर देगा, जैसा कि आपातकाल के बाद हुआ था। यदि ऐसा शीघ्र ही हो गया तो सत्ता के मदमस्त हाथी पर अंकुश लगेगा। लोकतंत्र का संतुलन शायद लौट पाएगा। क्या इससे देश को लाभ नहीं होगा?

 डॉ. वेदप्रताप वैदिक




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