लुधियाना-जालंधर, ( न्यूज नेटवर्क ), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा ट्विटर पर अभद्र टिप्पणियां और अशील धमकियां मिलने के बाद कारगिल के शहीद की 21 वर्षीय बेटी गुरमेहर ने आज जालंधर स्थित अपने घर के बाहर आकर मीडिया से मुखातिब होते हुए स्पष्ट कहा कि वह अब वापिस दिल्ली जाकर अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। गुरमेहर ने यह भी कहा कि अब वह इस मामले से बाहर आना चाहती है।
गुरमेहर ने यह भी कहा कि कुछ लोग मेरी बहादुरी और हिम्मत पर सवाल उठाते हैं। मैं उन्हें कहना चाहती हूं कि मैं किसी भी प्रकार की धमकियों से डरने वाली नहीं। उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता अपनाने वाले अब दो बार जरूर सोचेंगे। पंजाब की ही नहीं बल्कि देश की बेटी बनकर उभरी गुरमेहर ने स्पष्ट किया कि जो लोग उसके साहस पर सवाल खड़ा करना चाहते हैं, मैं उनके मुकाबले में कहीं ज्यादा हिम्मत रखती हूं। उल्लेखनीय है कि पिछले दो दिन पहले दिल्ली स्थित लेडी श्रीराम कालेज से ग्रेजुएशन कर रही गुरमेहर अपने पैतृक शहर जालंधर लौट आई थी।
उसने रामजस कालेज में छात्रों के गुटों के बीच हुई हिंसा के विरोध में शुरू किए अपने अभियान से पीछे हटने की घोषणा की थी। हालांकि दिल्ली पुलिस ने गुरमेहर को दुष्कर्म की धमकी देने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। गुरमेहर देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई थी। जालंधर स्थित अर्बन एस्टेट में शहीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर और उसके पारिवारिक सदस्यों ने पिछले 24 घंटों के दौरान मीडिया से काफी दूरी बना ली थी। गुरमेहर जब 3 वर्ष की नन्ही बच्ची थी तो 6 अगस्त 1999 को उसके पिता मनदीप सिंह ने पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ते हुए शहादत दी थी।
गुरमेहर के 80 वर्षीय दादा कंवलजीत सिंह ने मीडिया से शिकायत भरे लहजे में कहा था कि उसकी पौती को धमकियां देने वाले ज्यादा से ज्यादा क्या कर लेंगे? उन्होंने कहा कि मैंने अपना बेटा खोया है और अब गंदे लोग मेरी पौती को भी मार देना चाहते हैं। दादा कंवलजीत सिंह ने अपनी पौती का बचाव करते हुए कहा कि गुरमेहर ने देश के खिलाफ कुछ नहीं बोला और लोग ना जाने क्या-क्या उल-जुलूल बकवास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गुरमेहर कौर उनकी पौती नहीं बल्कि बेटा है और कालेज-यूनिवर्सिटियां बच्चों के लिए पढ़ाई का पवित्र स्थान हैं।
सियासी टिप्पणियों से छात्रों को दूर ही रहना चाहिए। सियासी लोगों द्वारा कैप्टन मनदीप सिंह हैरी की शहादत पर उठ रहे सवालों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि चंद मुट्ठीभर गंदे लोगों ने उनके बेटे द्वारा राष्ट्र के लिए दी गई शहादत का मजाक बनाया है, जो शोभनीय नहीं था। गुरमेहर की मां राजविंद्र कौर को अपनी बेटी पर गर्व है, वह आज भी गुरुघर की दी हुई बख्शीश रूपी गुरमेहर का शुक्राना देने हर रोज उसी गुरुद्वारा साहिब की दहलीज पर जाती हैं, जहां उसकी झोली भरी थी। ममतामयी मां के मुताबिक वाहेगुरु की कृपा से यह बच्ची मिली थी।
इसलिए उसका नाम गुरमेहर रखा गया। मां के मुताबिक उसकी बेटी धमकियों से डरकर नहीं भागी बल्कि ग्रेजुएशनकी परीक्षा पूरी होने के कारण वह पारिवारिक सदस्यों के बीच कुछ पल सुकून की तलाश में आई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी दलेराना बच्ची ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को लेकर शांति का संदेश दिया था। गुरमेहर ने इस मामले को लेकर कई ट्विस्ट किए थे जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैम्पस में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की ओर से शांति मार्च अभियान में छात्रों से शामिल होने का आह्वान किया था।
ट्विटर में मिल रही धमकियों के कारण दिल्ली छोडऩे से पहले उसने दुखी मन से अकेला छोड़ देने की प्रार्थना की थी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के एक कार्यक्रम में जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय के छात्र नेता उमर खालिद और शहला रसीद को बुलाने और वहां देश विरोधी नारेबाजी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आईसा के कार्यकर्ता के बीच हिंसक झड़प हुई थी।



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