- अम्बेडकर विश्वविद्यालय में भाषायी विकल्प को लेकर क्रांतिकारी युवा संगठन ने करवाया जनमत संग्रह
- छात्रों ने भाषाई विकल्प होने के लिए ‘हाँ’ कहा
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) कल, क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के कार्यकर्ताओं ने अम्बेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सरकारी स्कूल के छात्रों के साथ किये जा रहे भेदभाव के खिलाफ जनमत संग्रह करवाया| जनमत-संग्रह में 92% से भी ज्यादा संख्या में छात्रों ने भाषाई विकल्प चुनने के अधिकार पर ‘हाँ’ कहा| ज्ञात हो कि अम्बेडकर विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने वाले छात्रो का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली एवं अन्य राज्यों के सरकारी स्कूलों से पढ़कर आता है| सरकारी स्कूलों में हिंदी माध्यम/अन्य जन-भाषाओं में पढाई होती है परन्तु अम्बेडकर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी माध्यम में ही पढाई करवाई जाती है, जिसके कारण बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल से आने वाले हिंदी माध्यम के छात्र गैर-बराबरी और भाषाई समस्या झेलने को मजबूर हैं| ज्ञात हो कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बहुसंख्यक छात्र विश्वविद्यालय की भेदभावपूर्ण दाखिला प्रणाली का हर साल शिकार होते हैं, जिस कारण से दिल्ली के ही सरकारी स्कूलों से पढने वाले गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के छात्रों को दिल्ली सरकार द्वारा संचालित इस एकमात्र विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं मिलता है| पिछले हफ्ते केवाईएस ने एयूडी प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय में हिंदी कार्यान्वयन विभाग की स्थापना व अंग्रेजी की उपचारात्मक कक्षाओं को लगाये जाने की मांग की थी|
इसके अतिरिक्त, वंचित घरों से आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय का वातावरण भेदभावपूर्ण रहता है| वो अंग्रेजी का ज्ञान न होने के कारण कक्षाओं में पीछे छूट जाते है| जबकि एयूडी अपने प्रॉस्पेक्टस में ‘भिन्न-भिन्न की समस्याओं को जानने के बावजूद अभी तक प्रशासन ने हिंदी माध्यम छात्रों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं चलाने, या कोर्स मटेरियल हिंदी में उपलब्ध कराने कि कोई भी कोशिश नहीं की है|
केवाईएस ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि विश्वविद्यलय आगामी सत्र से सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 10% रियायती अंक लागू करने, प्रवेश परीक्षा हिंदी/अन्य जन-भाषाओं और अंग्रेजी माध्यम में आयोजित करने, छात्रों से ली जाने वाली ऊँची फीस में कटौती करने की घोषणा करे| केवाईएस इन मांगों के नहीं माने जाने पर अम्बेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन की छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक जन आन्दोलन खड़ा करने का संकल्प लेता है|




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