नई दिल्ली: इंफोसिस ने साफ कर दिया है कि इसके संस्थापक कंपनी में अपनी पूरी की पूरी हिस्सेदारी नहीं बेचने जा रहे हैं. संस्थापकों का इसमें कुल 12.75 फीसदी हिस्सा है. कंपनी ने उस मीडिया रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विसेस एक्सपोर्ट कंपनी के फाउंडर्स कंपनी में अपना हिस्सा बेच रहे हैं.
कंपनी के संस्थापक हिस्सेदारी बेचने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. रिपोर्ट में इस पूरे मामले वाकिफ लोगों का हवाला दिया गया था. हालांकि रिपोर्ट में कंपनी के एक फाउंडर नारायण मूर्ति की ओर से इस प्रकार की किसी संभावना से इंकार का जिक्र भी किया गया था.
कंपनी ने एक स्टेटमेंट जारी कर कहा- इंफोसिस के पास 'इससे जुड़ी कोई सूचना नहीं' है और इस प्रकार के कयासों को कंपनी के प्रमोटर्स द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका है.
कंपनी के शेयरों में आज 3.5 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है. दरअसल फाउंडर नारायण मूर्ति कंपनी के बोर्ड को पहले ही खरी खरी सुना चुके हैं. नारायण मूर्ति ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठाए थे. सीईओ विशाल सिक्का और नारायण मूर्ति के बीच विवाद भी सामने आया था. नारायण मूर्ति ने सीनियर एग्जीक्यूटिव की ऊंची सैलरी पर सवाल उठाए थे.
इंफोसिस 1981 में सात इंजीनियरों द्वारा स्थापित की गई थी. इनमें नारायण मूर्ति भी एक थे. इन संस्थापकों ने 250 डॉलर इसमें लगाए थे जोकि उन्होंने अपनी पत्नियों से जुटाए थे. कंपनी तेजी से फलती फूलती गई थी.



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