यरूशलम, हरिंदर मिश्रा, (भाषा) आतंकवाद और चरमपंथ के बढ़ते खतरे को लेकर साझी चिंता व्यक्त करते हुये भारत और इस्राइल ने आपने सामरिक हितों की सुरक्षा के लिये सहयोग पर सहमति जताई और आतंकी संगठनों तथा उनके प्रायोजकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का आहवान किया।
अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के बाद कहा कि भारत आतंकवादी संगठनों द्वारा हिंसा और नफरत से सीधे तौर पर पीड़ित है और यही हाल इस्राइल का भी है।
मोदी ने कहा कि अपनी बातचीत में वे और नेतन्याहू आतंकवाद से लड़ने और अपने सामरिक हितों की सुरक्षा के लिये साथ मिलकर और काम करने पर सहमति जताई।
बाद में एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने माना कि आतंकवाद वैश्विक शांति और स्थायित्व के लिये बड़ा खतरा है तथा उसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने के लिये अपनी मजबूत प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
इसमें कहा गया, Þ Þउन्होंने जोर दिया कि किसी भी आधार पर आतंकी कृत्य को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। Þ Þ बयान में कहा गया कि नेताओं ने जोर दिया कि आतंकवादियों, आतंकी संगठनों, उनके नेटवर्को और उन सभी के खिलाफ जो उन्हें बढ़ावा, समर्थन, आथर्कि मदद और पनाह देते हैं पर कड़ी कार्वाई होनी चाहिये।
इसमें कहा गया कि दोनों नेताओं ने कंप्रेहेन्सिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म :सीसीआईटी: को जल्द अपनाने के लिये सहयोग पर भी प्रतिबद्धता जताई।
इस्राइल के दौरे पर आये पहले भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, Þ Þहमारा लक्ष्य ऐसे रिश्ते बनाने का है जिसमें हमारी साझा प्राथमिकतायें परिलक्षित हों और हमारे लोगों के बीच स्थायी संबंध बनें। Þ Þ दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष, कृषि और जल संरक्षण समेत सात समझौतों पर दस्तखत किये।
भारत और इस्राइल ने औद्योगिक शोध और विकास तथा नवोन्मेष के लिये 4 करोड़ अमेरिकी डॉलर के कोष की स्थापना पर भी सहमति जताई है। दोनों देश इसके लिये दो-दो करोड़ डॉलर देंगे।



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