संपादकीय
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| संजय त्रिपाठी |
हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन की पाक के एक टीवी पर दिए हालिया बयान ने यह सावित कर दिया है कि पाकिस्तान सिर्फ आंतकियों के लिए पनाहगार ही नहीं है, बल्कि यह आतंकी पैदा करने वाला देश भी है । भारत के प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरा से एक दिन पूर्व अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित किया । ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा को स्वाभाविक ही मोदी की अमेरिका यात्रा की एक खास कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा गया । हालांकि अमेरिका ने सलाहुद्दीन को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कर यह तो स्पष्ट कर दिया कि कश्मीर का तथाकथित आजादी का सशस्त्र आंदोलन चलाने वाले ऐसे लोग आतंकवाद का ही चेहरा हैं ।
सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई दावे किए हैं। कबूल किया है कि उसने भारत पर कई आतंकी हमले कराए, और खासकर भारतीय सुरक्षा बल उसके निशाने पर रहे हैं। उसके इन टिप्पणियों ने पाक को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है । उसने साथ ही यह भी कहा है कि आतंकी हमलों के लिए उसे बड़ी आसानी से पाकिस्तान में हथियार मिल जाते हैं । अपने ताजा बयान में उसने यह भी कहा है कि वह भारत में कही भी किसी भी वक्त आतंकी हमला कराने में सक्षम है । उसके द्वारा पाकिस्तान से मदद मिलने की बात में कोई भी शक की गुंजाइश नहीं है । भारत यह पहले से ही दुनिया के समक्ष कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंक को समाप्त करने में नहीं लगा है, बल्कि उसे पाल - पोष कर बड़ा करने में लगा है । हालांकि पाकिस्तान हमेशा ही दुनिया के सामने यह जोर देकर कहता रहा है कि वह अपने धरती का इस्तेमाल आतंक के लिए नहीं होने देगा, और जो ऐसा करेगा उसे बख्शा भी नहीं जायेगा । फिर पाकिस्तान सलाहुद्दीन को क्यों खुली छुट दे रखा है, बल्कि ट्रप प्रशासन द्वारा उसे अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने पर बिलबिलाते हुए यह क्यों कहा था कि जो व्यक्ति कश्मीरियों के आत्म-निर्णय के अधिकार का समर्थन करते हैं उन्हें आतंकी कहना सर्वथा अनुचित है। जब सलाहुद्दीन पाक टीवी पर स्पष्ट रूप से स्वीकार करता है कि उसने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम पर पहुंचाया है , और सबसे ज्यादा उसके निशाने पर भारतीय सुरक्षा बल रहे हैं । ऐसे हालात में पाकिस्तान को उसे कैद कर भारत को सौंप देना चाहिए । लेकिन वह ऐसा करेगा नहीं, क्योंकि पाकिस्तान तो आतंक का अड्डा है । पाकिस्तान की प्रतिक्रिया परोक्ष रूप से सलाहुद््दीन को महिमामंडित करने की कोशिश है।
मूलरूप से सलाहुद्दीन कश्मीर के बडगाम का रहने वाला है । 1989 में वह सीमापार चला गया और पिछले 27 वर्षो से पाक अधिकृत कश्मीर से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का संचालन करता रहा है । भारत में बहुत सारे आतंकी हमलों के पीछे उसका हाथ रहा है । जिसमें सैकड़ों आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए होगें । सलाहुद््दीन ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि वह कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश को रोक देगा। उसने कश्मीर में फिदायीन हमलावरों को प्रशिक्षण देने की भी धमकी दी थी।
एक समय परवेज मुसर्रफ ने भी स्वीकार किया था कि उनके कार्यकाल के समय में कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को चलाने वालों को मदद मिलती रही । अन्य हुक्मरानों के समय भी ऐसा होता रहा और आज भी ऐसा हो रहा है । दुनियों को गहराई में जाकर देखना चाहिए, खासतौर से अमेरिका और यूरोपिय देशों को जो आतंकवादी गतिविधियों से भारत के समान ही जूझ रहे हैं । लेकिन अमेरिका की रण्नीति कुछ अलग दिखती है । उसे भारत और पाक दोंनों को अपने अगल - बगल रखना है तभी तो गाहे- बगाहे सामरिक और गैर सामरिक दोनों स्तर पर पाकिस्तान का मदद करता रहता है । जिस तरह से उसने सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित किया है उसी तरह उसे पाकिसतान को भी आतंकी देश घोषित करना चाहिए, ताकि पाक जैसे अन्य देशों को भी यह सबक मिल सके ।
संजय त्रिपाठी
tripathi.sanjay290@gmail.com




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