नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) आज 6 सितम्बर को भारी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकारों और प्रगतिशील नागरिकों ने पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्त्ता, गौरी लंकेश की नृशंश हत्या के खिलाफ आज भारी विरोध प्रदर्शन किया| ज्ञात हो कि गौरी लंकेश लोगों को बांटने वाली राजनीति के खिलाफ लम्बे समय से आंदोलनरत थीं| इस हत्या से पहले भी पिछले दिनों ऐसे ही उन्नत सोच रखने वाले प्रोफेसर कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोल्कर और गोविन्द पान्सारे की भी हत्या कर दी गयी थी|
ज्ञात हो कि जातीय असमानता और धार्मिक वैमनस्यता से ग्रस्त भारत मे इस तरह के तर्कवादी सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है| अगर उनपर हमला किया जा रहा है इसका मतलब है कि कुछ लोग रूढ़िवादी सोच को समाज में बरकरार रखना चाहते हैं| खेद की बात यह है कि बीजेपी शासित केन्द्रीय सरकार में धार्मिक वैमनस्यता और जातीय हिंसा बढ़ी ही है| इस हत्या के पीछे हिंदूवादी संगठनों के हाथ होने की बात की जा रही है| साथ ही, इस हत्या से कांग्रेस सरकार की भी उदासीनता पता चलती है, जो प्रोफेसर कलबुर्गी की हत्या के बाद ऐसी घटना होने के बाद भी ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को टालती रही|
केवाईएस कड़े तौर पर गौरी लंकेश की नृशंस हत्या की भर्त्सना करता है और मांग करता है कि जल्द-से-जल्द सभी मुजरिमों को पकड़ा जाए| साथ ही, हत्या करने वालों के राजनीतिक समर्थकों का भी पता लगाया जाए|



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