आरक्षण के बहाने माया ने चला दलितों-पिछड़ों की एकता का दांव Maya goes on the pretext of reservation, the unity of Dalits and backward



मेरठ,  ( शांतिदूत न्यूज नेटवर्क )  मंडलीय महासम्मेलन में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा पर हमले भी किए और दलितों-पिछड़ों की एकता का कार्ड भी खेला। माया ने कहा कि भाजपा दलितों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म कर रही है। सब कुछ प्राइवेट सेक्टर को दिया जा रहा जहां पहले से ही आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। माया ने मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू होने से लेकर कांशीराम के फार्मूले तक का जिक्र किया। बसपा सुप्रीमो ने मायावती ने सवा घंटे से ज्यादा के भाषण में अतीत से वर्तमान को जोड़ने की कोशिश की। माया ने कहा कि वीपी सिंह की सरकार को 1989 में बसपा ने तीन शर्तो पर समर्थन दिया था। पहला डा. अंबेडकर को भारत रत्न, दूसरा मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करना और तीसरा राम मंदिर बनाने की मांग लेकर निकले आडवाणी को यूपी में घुसने से रोकना। वीपी सिंह ने तीनों शतेँ मानीं। मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू हुईं तो भाजपा दलितों-पिछड़ों को आरक्षण के खिलाफ खड़ी हो गई। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि आज देश में दलितों आदिवासियों की तरह ओबीसी का भी उत्पीड़न हो रहा है सरकारी नौकरियों में लाखो पद खाली पड़े हैं जो भरा नहीं जा रहे हैं 1995 में जब उनकी सरकार बनी थी तो उन्होंने दलितों-पिछड़ों अल्पसंख्यकों का अपनी सरकार में और नौकरियों में विशेष ध्यान रखा विशेष तौर पर दलितों मुस्लिमों अल्पसंख्यक और विकलांगों के कल्याण के लिए विभाग और मंत्रालय बनाएं महापुरुषों के नाम पर स्थलों को विकसित किया गया। माया ने कहा कि उनकी सरकार में बिना रिश्वत के सभी वर्गों के युवाओं को नौकरियां मिलीं। माया ने कहा कि उनकी सरकार में हर जाति के लोगों और अल्पसंख्यकों को भागीदारी मिली। माया ने अपने संबोधन में भाजपा और आरएसएस पर ही हमले किए। सपा का उन्होंने जिक्र तक नहीं किया। कांग्रेस के प्रति भी वह नरम ही रहीं। सियासी हलकों में इन दलों के प्रति उनकी नरमी के मायने निकाले जा सकते हैं। पैसे का लालच होता तो बेचती राज्यसभा के टिकट माया की सफाई मायावती ने कहा कि 14 अप्रैल 1984 को बसपा के गठन के वक्त विरोधियों ने कांशीराम की छवि को इन लोगों ने धूमिल करने की कोशिश की। तब यह कहते थे कि उनके पास सीआईए से पैसा आता है ,ताकि आम जनता के लोग गुमराह हो जाएं। मायावती ने कहा कि आज उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश हो रही है। माया ने कहा कि मुझे धन दौलत का लालच होता तो तीसरी सरकार के कार्यकाल में मैं 15 महीने में इस्तीफा क्यों देती,दूसरी पार्टियों की तरह धन इकट्ठा कर लेती। माया ने आगे कहा कि अगर धन का लालच होता तो वह भी डेढ़ सौ 200 करोड़ लेकर राज्यसभा में लोगों को भेज देती। लेकिन इसके बजाय आम जनता से जुड़े जमीन से निकले लोगों को राज्यसभा में भेजा। सरकार सचेत होती तो बागपत में न पलटती नाव मायावती ने कहा कि बागपत में नाव पलटने से 22 लोगों की मौत हो गई अगर सरकारी लापरवाही ना होती सरकार सचेत होती और नाव ठीक होती तो ऐसा नहीं होता। अस्पतालों में दवा नहीं,बाढ़ का दौरा हेलीकॉप्टर से मायावती ने प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आज प्रदेश के अस्पतालों में दवा नहीं है, डॉक्टर नहीं है औीर ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मर रहे हैं। बाढ़ का दौरा हेलीकॉप्टर से ही हो रहा है जमीन पर कुछ नहीं हो रहा है। कानून व्यवस्था में सरकार पिछली सरकार से भी पिट चुकी है।



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