- मेट्रो किराया वृद्धि को तुरंत वापस लेने की उठायी मांग
- किराया बढ़ाए जाने के पीछे जापानी कंपनी को फायदा पहुंचाना ही एकमात्र कारण
- मेट्रो यात्रियों के प्रतिनिधित्व समेत एक किराया समीक्षा कमिटी बिठाए जाने की मांग भी उठायी
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) दिल्ली मेट्रो कमयूटर्स एसोसिएशन (डी.एम.सी.ए) ने आज आम मेट्रो यात्रियों क साथ मिलकर मेट्रो किराए में बढ़ोत्तरी के खिलाफ शहरी विकास मंत्रालय पर प्रदर्शन कियाद्य इस विरोध प्रदर्शन में क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) और दिल्ली के विश्वविद्यालयों के आम छात्रों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सेदारी निभाईद्य डी.एम.सी.ए के प्रतिनिधियों ने केन्द्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री, श्री हरदीप सिंह पुरी के निजी सचिव, श्री बलदेव पुरुषार्थ को ज्ञापन सौंपकर उनसे तुरंत इस साल किये गये किराए में बढ़ोत्तरी को वापस लिए जाने की मांग की । ज्ञात हो कि इस साल मेट्रो किराए में यह बढ़ोत्तरी दूसरी बार की जा रही है । इस बढ़ोत्तरी से किराया दोगुना हो जाएगा । ज्ञात हो कि पहले की गयी किराया बढ़ोत्तरी इतनी ज्यादा थी कि यात्रियों की दैनिक संख्या में औसतन 2 लाख की कमी देखी गयी थी । डी.एम.सी.ए कार्यकर्ताओं ने इस साल मई में किराया बढ़ोत्तरी को लेकर केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डी.एम.आर.सी) के खिलाफ प्रदर्शन किया था । उन्होंने डी.एम.आर.सी को एक ज्ञापन सौंपकर अनुरोध भी किया था कि किराया कम करने की मांग को तुरंत माना जाए ।
किराए में बढ़ोत्तरी किये जाने के लिए जापानी एजेंसी को उसका ऋण दिया जाना कारण बताया जा रहा है जो उसने मेट्रो के निर्माण के लिए दिया था । दिए गये ऋण को चुकाने के लिए अब तक 3770.79 करोड़ रूपये दिया जा चुका है, जिसमे 2263.67 करोड़ ब्याज है और 1507.12 करोड़ मूल ऋण है । इसके अतिरिक्त पूरा ऋण चुकाने के लिए अभी 26,760.28 करोड़ रूपये चुकाए जाने बाकी हैं। यह साफ तौर पर दिखाता है कि ऋण से जापानी एजेंसी को ही मुनाफा हो रहा है, क्योंकि मूल ऋण से ज्यादा उसका ब्याज है। इसके अतिरिक्त, ऐसे ऋण के साथ अन्य शर्तें भी बाध्यकारी बनाये जाती हैं, जिससे ऋण देने वाली एजेंसी को बड़ा मुनाफा हो। साथ ही, अगर मेट्रो निर्माण और विस्तार के लिए भी वित्त जनता से लिए जाने वाले किराए से लिया जाएगा, तो मेट्रो में यात्रा करना नामुमकिन हो जाएगा।
मेट्रो एक जन सुविधा है और यात्रियों से सिर्फ यात्रा का किराया लिया जाना चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो मेट्रो निर्माण और विस्तार में होने वाले खर्चे को वहन करे।
डी.एम.सी.ए का मानना है कि इस फैसले के पीछे मेट्रो को चलाने में हो रहे नुक्सान का कारण पूर्णतः गलत है क्योंकि सरकार व्यापारी घरानों को तो लाखों करोड़ की टैक्स माफी दे रही है। साथ ही, मेट्रो अधिकारियों और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा दिया जा रहा तर्क कि घाटे के बावजूद मेट्रो का किराया अभी तक नहीं बढ़ाया गया था, पूर्णतः झूठ है क्योंकि पहले से ही मेट्रो का किराया काफी ज्यादा था और मेट्रो को बिलकुल ठसाठस भरकर मुनाफा कमाया जाता था। इसके अतिरिक्त, अन्य देशों में मेट्रो में मुहैया कराई जाने वाली सुविधाएं जैसे शौचालय, पेय-जल इत्यादि की भी दिल्ली मेट्रो में कमी है। साथ ही, दिल्ली मेट्रो अपने कर्मचारियों को ठेके पर नियुक्त करता है और उनको न्यूनतम मजदूरी भी न देकर, और भी अधिक मुनाफा कमाता है।
ज्ञात हो कि किराये में बढ़ोत्तरी के कारण महिलाओं को भीड़-भरी बसों में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ेगा, जिससे शोषण के मामले बढ़ेंगेद्य मजदूरों और छात्रों के लिए भी बढ़े किराए से परेशानी होगी, क्योंकि पहले से ही मेट्रो का किराया काफी ज्यादा था। यह बढ़ोत्तरी अगर वापस नहीं ली जाती है तो दिल्ली में प्रदूषण की समस्या भी बढ़ेगी क्योंकि इससे निजी वाहनों की संख्या में इजाफा होगा जिससे प्रदूषण बढ़ेगा जबकि समय की जरुरत है कि दिल्ली को प्रदूषण-मुक्त बनाया जाए।
केन्द्रीय मंत्री को सौंपे गये ज्ञापन में निम्नलिखित मांगों को उठाया गया है जिसमें एक समीक्षा कमिटी का गठन किया जाए जिसमे मेट्रो यात्रियों के प्रतिनिधियों को चुना जाए और उसको किराए पर फैसला लेने का अधिकार दिया जाए। समीक्षा कमिटी का निर्णय लेने तक किराया बढ़ोत्तरी के सभी फैसले वापस लिए जाएँ। छात्रों, वंचित और मजदूर वर्ग से आने वाले लोगों के लिए मेट्रो में रियायती पास की सुविधा दी जाए।
डी.एम.सी.ए ने अपने संघर्ष को और आगे ले जाने का निर्णय लिया है और आने वाले दिनों में सत्तासीन भाजपा सरकार के सांसदों और विधायकों का भी घेराव करेगा।




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