तारीफ मिलने के मौके कम ही आते हैं: रणवीर सिंह - ranveer singh shares an emotional post on instagram





नई दिल्ली: सोमवार को दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर की आने वाली फिल्म पद्मावती का ट्रेलर रिलीज हुआ. ट्रेलर देखकर ही ये अंदाजा लगाया जा सकता है फिल्म कितनी भव्य होगी. दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर का रानी-राजा का किरदार तो खूबसूरत लग ही रहा है, लेकिन बैड मैन लुक में रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी के किरदार में जो जान डाली है, वो लोगों को काफी पसंद आ रही है.

दर्शकों की तरफ से ट्रेलर को काफी कम समय में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. इस रिस्पॉन्स को देखकर रणवीर सिंह काफी भावुक हैं. इसी के चलते उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने फैन्स और फ्रेंड्स के लिए एक खत शेयर किया है.

 सीनियर्स, फ्रेंड्स और मीडिया

आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया. मुझे खुशी है कि आप सभी को हमारी आने वाली फिल्म का ट्रेलर पसंद आया. इतनी तारीफ मिलने के मौके कम ही आते हैं. यह हमारी पूरी टीम की दिन रात की मेहनत का नतीजा है. संजय सर जीनियस हैं. वह इस फिल्म के मास्टर क्राफ्टमैन हैं. उन्होंने इस फिल्म के लिए बहुत कुछ सहा है, बहुत त्याग किया है.

ट्रेलर का इतना पसंद किया जाना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत है. जो भी आप ट्रेलर में देख रहे हैं, वो संजय सर के पैशन और विजन का ही नतीजा है. वह बिना थके परफेक्शन के लिए काम करते हैं. मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिला है. उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है. मैं अब भी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हूं इसलिए हर किसी को अलग से शुक्रिया नहीं कह पाऊंगा, जैसा कि मैं आमतौर पर करता हूं. लेकिन आप सबने जो भी कमेंट्स किए हैं, उन्हें पढ़कर मैं काफी भावुक हूं.

1 दिसंबर को सिनेमाघरों में आपसे मुलाकात होगी. उम्मीद ये फिल्म आपके लिए यादगार अनुभव साबित होगी.

विद लव

रणवीर


पद्मावती के ट्रेलर को 9 अक्टूबर दोपहर 13:03 बजे रिलीज किया गया था. रिलीज का ये समय रखे जाने के पीछे भी एक खास वजह थी. दरअसल 1303 ईसवी की तारीख राजा रावल रत्न सिंह और अलाउद्दीन खि‍लीज के बीच हुई लड़ाई की गवाह है. कहानी की इस खास घटना को जिस क्रिएटिव अंदाज से ट्रेलर जारी करने के समय के साथ जोड़ा गया है इससे साफ है कि ट्रेलर में ऐसे कई राज हैं, जो दिसंबर तक फिल्म की फैंटेसी को और बढ़ा सकते हैं.




बॉलीवुड में लंबे अरसे से पीरियड फिल्मों को बनाने का दौर रहा है. दर्शकों की जितनी रुचि सांइस, फिक्शन बेस्ड फिल्मों के लिए है उतनी ही दिलचस्पी उनकी इतिहास के रोचक मुद्दों पर रही है. लेकिन इन हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्मों को बनाना शायद डायरेक्टर्स के लिए उतना आसान नहीं है. कई सालों की रिसर्च के जरिए तथ्यों को खंगालकर उसे पर्दे पर उतारना अपने आप में ही एक डायरेक्टर के लिए बड़ी चुनौती है. लेकिन इसी बीच फिल्म को लेकर कोई विवाद खड़ा हो जाए तो फिल्म की रिलीज को लेकर मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं, जैसा कि फिल्म पद्मावती के साथ हुआ.

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