देश की एकता के लिए सरदार पटेल ने भगीरथ का काम किया है: पीएम मोदी - run for unity organized today on sardar patels birthday in india





नई दिल्ली: पीएम मोदी ने सरदार पटेल की 142वीं जंयती पर 'रन फॉर युनिटी' को हरी झंडी दिखाई.  इससे पहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन कहा कि सरदार पटेल को हम बहुत ही जल्द भुला बैठे हैं. लेकिन सरदार साहब देश की आत्मा में विराजमान हैं. उन्होने देश की सांस्कृतिक  विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि हमने एकता अपनी विरासत से सीखा है. विश्व की हर परंपरा को हमने अपने अंदर समेटा है. देश की एकता के लिए सरदार पटेल ने भगीरथ काम किया है. इसका पूरे देश को पता चलना चाहिए. अपने  संबोधन के बाद पीएम मोदी ने वहां लोग मौजूद लोगों के साथ देश की एकता की शपथ ली.



आपको बता दें कि स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का आज 142वां जन्मदिवस है. इस मौके पर आज इंडिया गेट से सटे नेशनल स्टेडियम में 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद मार्ग स्थित पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया. इसके बाद झंडा फहराकर 'रन फॉर यूनिटी' को रवाना किया. इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और गृहमंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे. इस आयोजन की वजह से जाम ना लगे इसलिए इंडिया गेट और उसके आसपास के रास्तों पर ट्रैफिक डाइवर्ट किया गया था. इस आयोजन में करीब 15 हजार लोगों के शामिल हुए.



स्वतंत्रता संग्राम से लेकर मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. उनका जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव प्रेरणा के रूप में देश के सामने रहेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी थी. पीएम मोदी ने कार्यक्रम के माध्यम से कहा, “सरदार वल्लभभाई पटेल ने लाखों भारतीयों को 'एक राष्ट्र, एक संविधान' के अंतर्गत लाना सुनिश्चित किया और एकता और देशभक्ति का उनका संदेश 'न्यू इंडिया'  के लिए एक प्रेरणा है.”


सरदार वल्लभभाई पटेल ने युवावस्था में ही राष्ट्र और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया था. सरदार पटेल अपने कर्तव्य पथ पर किस तरह अडिग रहते थे, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, जब वह वकील के दायित्व का निर्वाह कर रहे थे. जब वह जज के सामने जिरह कर रहे थे, तभी उन्हें एक टेलीग्राम मिला, जिसे उन्होंने देखा और जेब में रख लिया. उन्होंने पहले अपने वकील धर्म का पालन किया, उसके बाद घर जाने का फैसला लिया. तार में उनकी पत्नी के निधन की सूचना थी.
Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment