1 नवंबर से दिल्ली एनसीआर में फर्नेस ऑयल और पेट कोक जलाने पर प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट - to ban on furnace oil and petcock





नई दिल्ली: प्रदूषण रोकने की कवायद में सुप्रीम कोर्टकी ओर से दिए गए एक फैसले से दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोगों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया है. अदालत ने 1 नवंबर से फर्नेस ऑयल और पेट कोक जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इनका इस्तेमाल टेक्स्टाइल्स, रबड़, शुगर मिल, स्टील, पेपर व पैकेजिंग उद्योग में होता है. इनसे जुड़े छोटे-मोटे लाखों कारखाने हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. हालांकि उद्योगों से जुड़े लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि इस फैसले को लागू करने से पहले उन लोगों को पर्याप्त समय दिया जाए. जिस पर अब न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ छह नवंबर को सुनवाई करेगी.



उद्योग समूह की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि उन्हें न्यायालय के 24 अक्तूबर के आदेश पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन ‘‘इसे लागू करने के लिए यथोचित समय दिया जाना चाहिए.’’वकील ने बताया कि न्यायालय ने एक नवंबर से फर्नेस ऑयल और पेट कोक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और कहा है कि आदेश का अनुपालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें बंद भी किया जा सकता है. इससे पहले उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकार (ईपीसीए) ने शीर्ष न्यायालय को सौंपी गयी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि ‘‘एनसीआर में फर्नेस ऑयल और पेट कोक की आपूर्ति, बिक्री और इस्तेमाल पर सख्ती से प्रतिबंध लागू करें.’’ अदालत ने अपने दो मई के आदेश में रेखांकित किया था कि दिल्ली में फर्नेस ऑयल और पेट कोक का प्रयोग प्रतिबंधित है. न्यायालय पर्यावरणविद् एमसी मेहता की ओर से वर्ष 1985 में दायर जनहित याचिका पर सुनवायी कर रहा था. याचिका में दिल्ली- एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया गया था.
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