विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत ने लंबी छलांग मारी है. व्यापार सुगमता के मामले में भारत 130 की रैंकिंग से निकलकर 100वें पायदान पर पहुंच गया है. हालांकि इस लंबी छलांग के लिए न नोटबंदी जिम्मेदार है और न ही जीएसटी.
विश्व बैंक की व्यापार सुगमता की इस रैकिंग में फिलहाल नोटबंदी और जीएसटी को शामिल ही नहीं किया गया है. इस बार रैंकिंग के लिए जो मानक तय किए गए थे. उसमें जीएसटी के असर को नहीं आंका गया है.
दरअसल विश्व बैंक की इस रिपोर्ट को 1 जून, 2017 तक के रिफॉर्म और नीतियों के आधार पर तैयार किया गया है. जीएसटी 1 जुलाई से लागू किया गया है. इस वजह से रैंकिंग सुधार में जीएसटी की भूमिका इस साल नहीं दिखाई दी है.
हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो अगले साल जीएसटी व्यापार सुगमता में भारत की रैकिंग सुधारने का सबसे बड़ा सुधार साबित हो सकती है. ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बैंक, विश्व बैंक समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने जीएसटी पर भरोसा जताया है.
इन संस्थाओं ने भले ही जीएसटी को विकास की रफ्तार रोकने वाला करार दिया है, लेकिन उसके साथ ही उन्होंने आगे इसे इकोनॉमी को लंबी अवधि में सहारा देने वाला भी बताया है.
मोदी सरकार ने पहला सबसे बड़ा रिफॉर्म नोटबंदी किया था. विश्व बैंक ने इसको भी अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया है. दरअसल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग तय करने के लिए जो मानक अथवा पैरामीटर तय किए गए थे. उसमें नोटबंदी के लिए कहीं जगह ही नहीं बनती.
विश्व बैंक के मुताबिक व्यापार सुगमता के मामले में रैंकिंग तय करने के लिए 11 पैरामीटर्स तय किए गए थे. इन पैरामीटर्स के आधार पर ही रैंकिंग दी गई है.
ये हैं वो 11 पैरामीटर्स
- बिजनेस शुरुआत करने का माहौल
- कंस्ट्रक्शन परमिट में सुगमता
- लेबर मार्केट को रेग्युलेट करने के लिए क्या कदम उठाए गए.
- देश में बिजली का दायरा कितना बढ़ा
- प्रॉपर्टी रजिस्टर करने में कितनी सुगमता है
- कर्ज लेना कितना जटिल या आसान है
- छोटे शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.
- सीमा पार व्यापार के मामले में देश की क्या स्थिति है.
- कर भुगतान के मामले में किसी देश का प्रदर्शन कैसा है.
- कॉन्ट्रैक्ट्स को कितने प्रभावी तरीके से लागू किया गया है.
- दिवालिया मामलों का समाधान करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.



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