नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उन्होंने देश के लिए जो महत्वपूर्ण सेवा दी हैं उसके लिए प्रत्येक भारतीय उनका कर्जदार है. देश के पहले उप प्रधानमंत्री पटेल का आजादी के तीन साल बाद 15 दिसंबर 1950 को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. मोदी ने ट्वीट किया,‘‘हम महान सरदार पटेल को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हैं. उन्होंने हमारे देश की जो स्मरणीय सेवा की, उसके लिए हर भारतीय उनका कर्जदार है. भारत के ‘‘लौह पुरूष’’ के नाम से जाने जाने वाले पटेल ने छोटी रियासतों के विलय के जरिए देश को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी.
संविधान निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान था. इस तथ्य को डॉ. अंबेडकर भी स्वीकार करते थे. सरदार पटेल मूलाधिकारों पर बनी समिति के अध्यक्ष थे. इसमें भी उनके व्यापक ज्ञान की झलक मिलती है. उन्होंने अधिकारों को दो भागों में रखने का सुझाव दिया था. एक मूलाधिकार और दूसरा नीति-निर्देशक तत्व.
मूलाधिकार में मुख्यत: राजनीतिक, सामाजिक, नागरिक अधिकारों की व्यवस्था की गई. जबकि नीति निर्देशक तत्व में खासतौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान दिया गया. इसमें कृषि, पशुपालन, पर्यावरण, जैसे विषय शामिल है. इन्हें आगे आने वाली सरकारों के मार्गदर्शक के रूप में शामिल किया गया. बाद में न्यायिक फैसलों में भी इसकी उपयोगिता स्वीकार की गई. यहां इस प्रसंग का उल्लेख अपरिहार्य था.
सरदार पटेल भारत की मूल परिस्थिति को गहराई से समझते थे. वह जानते थे कि जब तक अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान महत्वपूर्ण बना रहेगा, तब तक संतुलित विकास होता रहेगा. इसके अलावा गांव से शहरों की ओर पलायन नहीं होगा. गांव में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. आजादी के बाद भारत को एक रखना बड़ी समस्या थी.
अंग्रेज जाते-जाते अपनी कुटिल चाल चल गए थे. साढ़े पांच सौ से ज्यादा देशी रियासतों को वह अपने भविष्य के निर्णय का अधिकार दे गए थे. उनका यह कुटिल आदेश एक षड्यंत्र जैसा था. वह दिखाना चाहते थे कि भारत अपने को एक नहीं रख सकेगा. देश के सामने आजाद होने के तत्काल बाद इतनी रियासतों को एक रखने की चुनौती सामने थी. सरदार पटेल ने बड़ी कुशलता से एकीकरण का कार्य संपन्न कराया. इसमें भी उनका लौहपुरुष व्यक्तित्व दिखाई देता है.
उन्होंने देशी रियासतों की कई श्रेणियां बनाईं. सभी से बात की. अधिकांश को सहजता से शामिल किया. कुछ के साथ कठोरता दिखानी पड़ी. सेना का सहारा लेने से भी वह पीछे नहीं हटे. देश की एकता को उन्होंने सर्वोपरि माना. आजादी के बाद उन्हें केवल तीन वर्ष ही देश सेवा का अवसर मिला. इसी अल्प अवधि में उन्होंने बेमिसाल कार्य किए.
सरदार पटेल की ईमानदारी ऐसी कि निधन के बाद खोजबीन किए जाने पर उनकी निजी संपत्ति के नाम पर कुछ नहीं था. लेकिन उनके प्रति देश की श्रद्धा और सम्मान का खजाना उतना ही समृद्धशाली था. यह उनकी महानता का प्रमाण है.



0 comments:
Post a Comment