खुल्लम - खुला
लोग कहते हैं, ‘दिल्ली दिल से’। बचपन में सुनते थे - दिल्ली है दिलवालों की, मुंबई पैसेवालों की। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली अब विदेशियों के लिए अस्पताल का वार्ड बनता जा रहा है। आपने टीवी पर देखा और अखबारों में पढ़ा होगा कि श्रीलंका के खिलाड़ी फिरोजशाह कोटला मैदान में हवा की हवाई के कारण छटपटा रहे थें। मास्क लगाकर क्रिकेट खेलना तथा स्माॅग के कारण 26 मिनट तक मैच को रोकने का मामला विश्व की पहली घटना बताई जा रही है। आखिर हम 21 वीं सदी में विकाशील देशों की पंक्ति में खड़े होने में लगे है। देश की विश्व में कितनी किरकिरी हुई होगी, इसकी कल्पना से ही डर लग रहा है। ‘ अपने मुह मियां मिठू बनना’ हम लोगों की पुरानी आदत है। श्री लंका के कोच का कहना था कि दिल्ली की अबोहवा के कारण खिलाड़ी अस्पताल के किसी वार्ड में भर्ती जैसे हालात से गुजर रहे थे, क्योंकि पेवैलियन में दोनों टीमें गैस सिलेंडर इस्तमाल कर रही थी। अब जरा सोचे की हम विज्ञान और तकनीकि क्षेत्र में कितना विकसीत हुए है। हमारा पड़ोसी एक चीन है जहां हमारे देश से भी ज्यादा कुहासा और स्माॅग से स्थिति खराब रहता है। लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन के आगमन पर चीन ने अपने विकास का माॅडल पेश करते हुए उस क्षेत्र की दृश्य क्षमता बढ़ा दी जिसके कारण वहां सूर्य का प्रकाश साफ दिखने लगा । हमारा विकास आज कल गुजरात के चुनाव में पागल हो गया है। अब ताजा खबर यह है कि कोटला मैदान को आगे से टेस्ट मैच के लिए प्रतिबंधित कर दिया जायेगा । आईसीसी इस विषय पर बातचीत कर रही है। दिल्ली की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में शादी या किसी समारोह में पटाखा नहीं फोड़ने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट में प्रदूषण की वजह से क्रिकेटर्स को उल्टियों का जिक्र हुआ था । मैच के दौरान श्रीलंका टीम के खिलाड़ियों द्वारा मास्क पहनकर मैदान में आने तथा 56 मिनट में चार बार मैच रूकवाने के कारण सीके खन्ना ने कहा था कि कोहली को रोकने के लिए श्रीलंका ने तमाशा किया। हालांकि कमेंटेअर्स भी बोले थे कि यह कोहली का ध्यान भंग करने की रणनीति .... और थोड़ी देर में ही आउट हो गए विराट। सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक कमेंट चर्चा में रहा - कोहली एलबीडब्लू नहीं मास्क के शिकार । गुस्साए कोहली ने पारी ही घोषित कर दी थी। यह हैं हम और यह है हमारा देश। दिल्ली दिलवालों की अब नहीं रही, क्योंकि यहां की स्थिति अब ‘ हम तो डूबेंगे शनम तुम्हें भी ले डूबेंगे ’ जैसी हो गई है। आखिर हो भी क्यों न हम स्वतंत्र जो हो गए हैं।



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