नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीकी जमीन पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भारतीय टीम सीरीज के आखिरी वनडे मैच में शुक्रवार (16 फरवरी) को एक और जीत अपने नाम कर छह मैचों की सीरीज का अंत 5-1 से करने के इरादे से उतरेगी. भारत ने पहले ही 4-1 से सीरीज अपने नाम कर ली है, लेकिन वह किसी भी हालत में सीरीज को हार के साथ खत्म नहीं करना चाहेगी. दोनों टीमें सुपर स्पोर्ट पार्क मैदान पर आमने-सामने होंगी. इससे पहले इसी सीरीज में यह दोनों टीमें इस मैदान पर दूसरे वनडे में भिड़ चुकी हैं. इस मैच में भारत ने नौ विकेट से जीत दर्ज की थी.
पांचवें वनडे में भारत ने मेजबान टीम को 73 रनों से मात दी थी और इसी के साथ दक्षिण अफ्रीका में पहली वनडे सीरीज जीतने का इतिहास रचा था. इस सीरीज जीत के साथ ही भारत आईसीसी वनडे रैंकिंग में पहले स्थान पर आ गया था. टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ छठे और आखिरी वनडे में अपनी बेंच स्ट्रेंथ को आजमाने उतरेगी जबकि मेजबान का प्रयास प्रतिष्ठा बचाने का होगा.
वहीं, मेजबान टीम इस स्थिति में एक ही कोशिश कर सकती है वो है सीरीज का अंत जीत के साथ करने की, लेकिन वो भी जानती है कि यह उसके लिए किसी भी लिहाज से आसान नहीं है क्योंकि भारत ने इस पूरी सीरीज में जो क्रिकेट खेली है वो मेजबान पर पूरी तरह से खेल के हर विभाग में हावी होकर खेली है. मेहमान सीरीज जीतने के बाद इस मैच को किसी भी हालत में हल्के में तो नहीं लेगा. वह इस मैच में वही क्रिकेट खेलना चाहेगा जो अभी तक खेलता आ रहा है.
भारतीय टीम छह मैचों की सीरीज पहले ही 4-1 से जीत चुकी है. उसे एकमात्र पराजय जोहानिसबर्ग में वर्षाबाधित चौथे वनडे में मिली थी. पिछले मैच में मिली जीत के साथ भारत ने आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर वन का स्थान दक्षिण अफ्रीका से छीन लिया है. भारत उसी लय को कायम रखने के इरादे से उतरेगा क्योंकि इसके बाद टी-20 सीरीज भी तुरंत होनी है. इस साल लंबे विदेशी सत्र को ध्यान में रखते हुए कप्तान विराट कोहली बेंच स्ट्रेंथ को भी आजमाना चाहेंगे.
पिछले मैच से पहले रोहित शर्मा के बल्ले से रन न निकलना भारत की परेशानी जरूर थी, लेकिन रोहित ने पांचवें वनडे में शतक जमाते हुए उस परेशानी को भी दूर कर दिया है. शिखर धवन और रोहित दोनों अपनी फॉर्म में हैं और अगर दोनों का बल्ला एक साथ चलता है तो दक्षिण अफ्रीका को परेशानी हो सकती है.
वहीं, विराट कोहली का बल्ला भी रन उगल रहा है. भारत की परेशानी एक यह है कि शीर्ष-3 के आउट होने के बाद उसकी पारी बिखर जाती है. मध्य क्रम तथा निचला क्रम संभल नहीं पाता है और लगातार विकेट खोता रहता है. पिछले कुछ मैचों से यही देखने को मिला है.
अजिंक्य रहाणे, हार्दिक पांड्या और महेंद्र सिंह धोनी अभी तक सीरीज में कुछ खास नहीं कर पाए हैं. सीरीज जीत जाने के बाद भारतीय कप्तान कोहली इस मैच में कुछ बदलाव कर सकते हैं और बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को प्लेइंग में उतार सकते हैं. ऐसे में दिनेश कार्तिक, मनीष पांडे, केदार जाधव को आखिरी मैच में खेलने का मौका मिल सकता है.
भुवनेश्वर कुमार ने श्रीलंका में सीमित ओवरों की सीरीज के बाद से लगातार खेला है, जिसमें 19 वनडे, छह टी-20 मैच और दो टेस्ट शामिल है. जसप्रीत बुमराह भी 20 वनडे और आठ टी-20 खेल चुके हैं. टेस्ट सीरीज खेलने से उनका कार्यभार और बढ़ गया. दोनों को आराम की जरूरत है. भारत के वैकल्पिक तेज गेंदबाजों को भी आजमाना जरूरी है. श्रीलंका दौरे के बाद से भारत ने 20 वनडे खेले हैं और भुवनेश्वर बुमराह की जोड़ी सिर्फ एक में बाहर रही जो बेंगलुरू में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया था. टीम इंडिया की इन दोनों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, लेकिन 2019 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए टीम प्रबंधन दूसरों को भी आजमाना चाहेगा.
मोहम्मद शमी ने 2015 विश्व कप के बाद सिर्फ तीन वनडे खेले हैं. चोट से लौटने के बाद उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछले साल दो और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच खेला. मौजूदा टीम में चौथे तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर ने दो वनडे ही खेले हैं. भारत को भुवनेश्वर और बुमराह से आगे भी तेज आक्रमण के बारे में सोचना होगा.
मध्यक्रम पर भी गौर करने की जरूरत है. इस सीरीज में चौथे से सातवें नंबर के बल्लेबाजों के बीच सिर्फ एक अर्धशतक बना है. अजिंक्य रहाणे ने डरबन में अर्धशतक बनाया जबकि एम एस धोनी ने वांडरर्स पर 43 गेंद में नाबाद 42 रन बनाए. श्रेयस अय्यर दोनों मैचों में अच्छी शुरूआत को बढ़िया पारी में नहीं बदल सके. रहाणे नंबर चार पर विफल रहे जबकि हार्दिक पांड्या चार मैचों में 26 रन ही बना सके. भारत के लिए शीर्ष क्रम ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन मध्यक्रम अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका.
इस सीरीज में भारत की जीत की अहम वजहों में से एक चाइनामैन कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की जोड़ी रही है. इस जोड़ी ने अपनी फिरकी में मेजबान टीम को इस तरह से फंसाया है कि उसके बल्लेबाज अभी तक इस जोड़ी की काट नहीं ढूढ़ पाए हैं. एक बार फिर भारत के लिए यह जोड़ी जीत की चाबी साबित हो सकती है.
दक्षिण अफ्रीका इस मैच में हाशिम अमला और अब्राहम डिविलियर्स पर ज्यादा निर्भर करेगी. इन दोनों के अलावा ज्यां पॉल ड्यूमिनी और डेविड मिलर पर भी बड़ी जिम्मेदारी होगी. गेंदबाजी का दारोमदार काफी हद तक कागिसो रबादा और पिछले मैच में चार विकेट लेने वाले लुंगी नगिड़ी पर होगा. ऑस्ट्रेलिया के दौरे से पहले कई शीर्ष गेंदबाजों को आराम दिया गया और कागिसो रबाडा, मोर्ने मोर्कल, इमरान ताहिर, लुंगी एनगिडि के पास छाप छोड़ने का यह आखिरी मौका है.



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