नई दिल्ली: दिल्ली घेराव के लिए जा रहे किसानों को हरियाणा के विभिन्न इलाकों से पुलिस ने हिरासत में लिया. यमुनानगर के रादौर से सैंकड़ों किसानों को हिरासत में लिया गया और शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें से 35 किसानों को जेल भेज दिया गया. वहीं 150 किसानों पर हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. किसानों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ ही उन पर प्लास्टिक की गोलियां चलाईं. वहीं पुलिस ने इन आरोपों को गलत बताते हुए किसानों द्वारा पुलिसकर्मियों पर पथराव करने की बात कही.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसानों ने पुलिस पर प्लास्टिक की गोलियां चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि, पहले पुलिस ने उन पर लाठीचार्च किया और फिर प्लास्टिक की गोलियां चलाईं. अब उन्हें ही हिरासत में लेते हुए हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है.
वहीं पुलिस ने अपने बचाव में प्लास्टिक की गोलियां चलाने की बात को नकारा है. पुलिस की ओर से कहा गया कि किसानों द्वारा लगातार पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके जा रहे थे. हालांकि, इसमें कोई भी किसान गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन पत्थर लगने से जानलेवा चोट आ सकती थी. पुलिस ने कहा कि पहले किसानों को जाम खोलने के लिए समझाया गया, लेकिन उन्होंने कहासुनी करते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया. जिसके बाद लाठीचार्ज करना पड़ा और किसानों को हिरासत में लिया गया.
किसानों पर हत्या का मामला दर्ज किए जाने पर हिंदुस्तान टाइम्स को दिए बयान में पुलिस रादौर के डीएसपी अजय राणा ने कहा, कि किसानों द्वारा किए गए पथराव में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद किसानों पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया.
बताया जा रहा है कि किसानों पर साजिश रचने, नेशनल हाईवे जाम करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने समेत अन्य धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया गया है. वहीं एफआईआर में किसानों द्वारा पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है.
मामले में वरिष्ठ जानकारों का कहना है कि किसानों को जमानत मिलने में समय भी लग सकता है. कोर्ट मामले में किसानों पर लगे आरोपों को किस तरह लेता है ये सब इसी पर निर्भर है.



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