सी.एस.डब्ल्यू ने बजट को महिलाओं की उम्मीदों के खिलाफ बताया CSW told the budget against women's expectations



  • केंद्रीय बजट में महिलाओं और बच्चों सम्बन्धी मुद्दों की उपेक्षा की कड़ी निंदा
  •  महिला पीड़िताओं के लिए निर्भया केन्द्रों के निर्माण के लिए कोई भी आवंटन नहीं


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  संघर्षशील महिला केंद्र(सीएसडब्लू) का मानना है की देश में बच्चों की बढ़ रही मृत्युदर और महिलाओं की बढती असुरक्षा आदि मुद्दों को नजरअंदाज़ कर रहा केंद्रीय बजट महिलाओं और बच्चों के साथ एक विश्वासघात है| नए बजट में गरीबी-ग्रस्त वर्गों को उपलब्ध कराई जा रही खाद्य-सब्सिडी में बढोतरी नहीं की गयी है| देश में हजारों की संख्या में कुपोषित महिलाएं और बच्चे इस उपेक्षा से बुरी तरह प्रभावित होंगे|    

ज्ञात हो कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ज़रूरी आवंटन को पूरी तरह नज़रंदाज़ किया गया है| इस बजट में भारत के हर जिले में यौन-उत्पीड़न और बलात्कार पीड़िताओं की सहायता के लिए खोले जाने वाले निर्भया केन्द्रों के लिए राशि नहीं आवंटित की गयी है| पिछले सालों में भी इस ओर कुछ भी ध्यान नहीं दिया गया था, जबकि अभी भी देश के ज्यादातर जिलों में कोई भी निर्भया केंद्र नहीं खुला है| साथ ही, सरकार ने पिछले सालों में आवंटित फण्ड का उपयोग सुनिश्चित किये जाने की भी कोई कोशिश नहीं की है| ज्ञात हो कि दिल्ली में पिछले साल के फण्ड का ज्यादातर हिस्सा अभी तक उपयोग नहीं किया गया है|

बजट में महिला और बाल कल्याण मंत्रालय को धन आवंटित करने में की गयी उपेक्षा यह साफ़ दर्शाता है कि सरकार जीवन जीने के मौलिक अधिकार और समानता के लिए चिंतित नहीं है| उदाहरण स्वरुप, अनौपचारिक क्षेत्रों(यौन उत्पीड़न रोकथाम विधेयक, 2013) के अनुसार उन कार्यस्थलों पर जहाँ 20 अथवा कम संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं, वहाँ यौन-उत्पीडन रोकथाम समितियों के गठन के लिए नए बजट में कोई वित्तीय प्रतिबधता नहीं दिखाई गयी है| यह भी तब जबकि महिलाओं और बच्चों की बड़ी आबादी अनौपचारिक क्षेत्रों में काम कर रही है|

महिला आंदोलन की अन्य मांगों जैसे अधिक क्रेच, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल के निर्माण की मांग को भी नजरअंदाज़ किया गया है| इसी तरह, महिलाओं के लिए विशेष वृद्धावस्था पेंशन योजना के प्रावधान की लंबे समय उठाई जा रही मांग को भी ठन्डे बसते में डाल दिया गया है।


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