नयी दिल्ली, ( शांतिदूत न्यूज नेटवर्क ) विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक ज्ञापन सौंप कर सीबीआई की विशेष अदालत के जज बी. एच. लोया की मौत के मामले में न्यायालय की निगरानी में एसआईटी जांच कराने की मांग की। सांसदों ने कहा कि उन्हें सीबीआई या एनआईए की जांच पर भरोसा नहीं है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक सहित कई राजनीतिक पार्टियों के सांसदों ने आज राष्ट्रपति से मुलाकात की और मांगों से युक्त ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया, ‘‘कानून की महिमा बरकरार रखने के लिए हम आपसे इस मामले में दखल देने का अनुरोध करते हैं। उच्चतम न्यायालय की ओर से चुनी गई स्वतंत्र अधिकारियों की टीम और न्यायालय की ही निगरानी में गहन जांच की जरूरत है।’’ इस ज्ञापन पर तृणमूल कांग्रेस, सपा, एनसीपी, द्रमुक, राजद, ‘आप’ और वामपंथी पार्टियों सहित 15 पार्टियों के 114 सांसदों के दस्तखत हैं। बसपा ने पत्र पर दस्तखत नहीं किए हैं।
सांसदों ने कहा कि सीबीआई और एनआईए का पिछला रिकॉर्ड देखते हुए जांच की जिम्मेदारी उन्हें नहीं सौंपनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा, ‘‘ऐसी प्रक्रिया से लोगों की नजरों में संस्था की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी। हम उम्मीद करते हैं कि आप न्याय दिलाने के लिए अपने पद का अच्छा इस्तेमाल करेंगे।’’
विपक्ष की तरफ से लगाए जा रहे आरोपों की अगुवाई कर रहे राहुल गांधी ने कहा कि बहुत सारे सांसदों का मानना है कि लोया की मौत और उसके बाद हुई दो और मौतों में कुछ संदेहास्पद है।
राष्ट्रपति से मिलने के बाद राहुल ने कहा, ‘‘बहुत सारे सांसद जज लोया और दो अन्य की मौत के मामले में मानते हैं कि कुछ संदेहास्पद है। वे स्वतंत्र जांच चाहते हैं और सीबीआई को जांच नहीं सौंपना चाहते।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सकारात्मक प्रतिक्रिया जाहिर की और उन्हें आश्वस्त किया कि वह मामले को देखेंगे।
सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे लोया की एक दिसंबर 2014 को उस वक्त मौत हो गई थी जब वह अपने एक सहकर्मी की बेटी की शादी में नागपुर गए थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी थे, लेकिन बाद में उन्हें आरोप-मुक्त कर दिया गया।



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