नयी दिल्ली । केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो शीर्ष अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद उठे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकार ने कहा है कि जांच एजेन्सी में असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की सिफारिश पर उसने यह कदम उठाया है।
सरकार की ओर से बुधवार को जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि सीवीसी अधिनियम 2003 की धारा 8 के तहत सर्तकता आयोग को सीबीआई के कामकाज की निगरानी करने का अधिकार है। उसने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए जांच एजेन्सी के दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया है।
वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों के आरोप प्रत्यारोप की खबरें मीडिया में बडे पैमाने पर आ रही थी और इससे सीबीआई में कामकाज का माहौल बिगड रहा था। गुटबंदी के चरम पर पहुंचने से इस प्रमुख जांच एजेन्सी की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा पर सवाल उठ रहे थे। सरकार ने कहा कि सीवीसी के अनुसार सीबीआई निदेशक इस समूचे प्रकरण में उसका सहयोग नहीं कर रहे थे। उसने कहा है कि यह अंतरिम व्यवस्था है और यह रोक मौजूदा असाधारण और अभूतपूर्व हालात पैदा करने वाले सभी मामलों में सीवीसी की जांच पूरी होने और सीवीसी या सरकार के कानून के तहत उचित फैसला लेने तक बनी रहेगी। इस दौरान जांच एजेन्सी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव तत्काल प्रभाव से एजेन्सी के प्रमुख की जिम्मेदारी निभायेंगे।



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