- घुमंतू जनजाति और लाखों कामगार सड़कों पर बिना खाने-पानी के फंसे, कोई सरकारी मदद नहीं
- शेल्टरों में खाने की भारी कमी, कामगारों को नौकरियों से निकाला जा रहा, केंद्र और राज्य सरकारों के बड़े-बड़े दावे हुए झूठे साबित
- केवाईएस ने कामगारों को काम से निकालने वाले मालिकों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली । देश-भर में जिला प्रशासन लॉकडाउन को लागू करवाने के लिए बिलकुल तानाशाही रवैया अख्तियार कर रहे हैं, जो कि कल बरेली में प्रवासी कामगारों के ऊपर कीटनाशक का छिड़काव किए जाने की घटना से सामने आया। केवाईएस इस घटना की कड़ी भर्त्सना करता है और यह मांग करता है कि इसके जिम्मेदार सभी जिला प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाए। यह तानाशाही कदम ऐसी ही तमाम कदमों की फेहरिस्त में एक कड़ी है, जिनके कारण पूरे देश में सड़कों पर अपने घर जाने को मजबूर कामगारों से अपराधियों की तरह बर्ताव किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि केंद्र और राज्य सरकारें सड़कों पर फंसे कामगारों के दुख और पीड़ा को लेकर पूरी तरह से उदासीन हैं और उनको सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठा रही हैं। कोई भी मदद न मिलने से खुद घर जाने को मजबूर कामगारों में से करीब 22 कामगारों की दुर्घटना या बीमारी से मौतें हो चुकी हैं, जो कि कोरोनावाइरस से मरने वाले लोगों के समानान्तर संख्या है।
केवाईएस देश भर में फंसे लाखों कामगारों की की दुर्दशा और अनदेखी के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की कड़ी निंदा करता है। कई रिपोर्टों में ऐसा सामने आ रहा है की लॉकडाउन के कारण महाराष्ट्र, ओड़िशा, जम्मू व कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों में घुमंतू जनजाति के लोगों को फंसा हुआ छोड़ दिया गया है। उनके हालात शहरों में फसें लाखों मजदूरों जैसे है, जो लॉकडाउन के चलते भोजन और आश्रय की कमी के कारण फंसे हुए हैं। दिल्ली में देखने को मिल रहा है कि सरकार के लंबे-लंबे दावों के बावजूद आश्रय-स्थलों में भोजन अपर्याप्त है। मौजूद रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा कई शेल्टरों पर जितने लोगों के लिए भोजन का इंतजाम किया जा रहा है उससे 10 गुना अधिक संख्या में लोग मौजूद है। इसके साथ ही, कामगारों की बड़ी संख्या में छंटाई की जा रही है, जिसके कारण वो बिना नौकरी, खाना और पैसे जीने को मजबूर हैं। ऐसे समय में, यह जरूरी है सरकार विशेष ध्यान देते हुए शहरों में फंसे हुए कामगारों को जिनका बड़ा हिस्सा लघु एवं मझोले उद्योगों में कार्यरत था, उन तक मदद पहुंचाए।
साथ ही, केवाईएस देश भर के जिला प्रशासनों और राज्य सरकारों की उदासीनता की कड़ी निंदा करता है। केवाईएस यह मांग करता है कि फंसे हुए कामगारों को सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया की जानी चाहिए, और उनके साथ दुर्व्यवहार करते पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केवाईएस यह भी मांग करता है कि केंद्र और राज्य सरकारें खोखले दावे करने के बजाय, कामकाजी लोगों को भोजन और आवश्यक चीजें सुनिश्चित करें। लॉकडाउन के दौरान काम से छंटाई करने वाले मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रवासी कामगारों और घुमंतू जनजाति के लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से तत्काल उपाय किए जाएँ और यह ध्यान रखा जाए कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान भोजन, आश्रय और स्वच्छता सामग्री लगातार मिलती रहे। लॉकडाउन की विषम परिस्थिति के दौरान केवाईएस के कार्यकर्ता देश भर के विभिन्न राज्यों में फंसे श्रमिकों के लिए सहायता अभियान में अपना योगदान जारी रखेंगे।



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