- अब तक सर्वेक्षण में हजारों छात्रों ने ली हिस्सेदारी
- ज्यादातर एसओएल छात्रों के लिए अधूरा और खराब स्टडी मटेरियल, इंटरनेट सुविधा और कंप्यूटर, स्मार्टफोन न होना सबसे बड़ी समस्याएँ
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के बीच डीयू के ऑनलाइन परीक्षा कराने के हालिया फैसले के खिलाफ सर्वेक्षण आयोजित किया है।
ज्ञात हो कि डीयू के इस फैसले से डीयू के छात्र और शिक्षक बेहद ही मानसिक तनाव की स्थिति में हैं। इस फैसले का सबसे खराब असर वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले लाखों एसओएल छात्रों पर पड़ेगा जिनके पास ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए मूलभूत चीजें जैसे कंप्यूटर व स्मार्टफोन, स्थिर व तेज इंटरनेट, और अच्छे और पूरे स्टडी मटेरियल की भारी कमी रही है।
केवाईएस इस सर्वेक्षण को एसओएल छात्रों की चिंताएँ जानने के लिए कर रहा है, जिनके मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है, क्योंकि वो वंचित घरों से आते हैं। ज्ञात हो कि अभी तक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले छात्रों में 91 प्रतिशत ने ऑनलाइन परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। साथ ही, 70 प्रतिशत से ज्यादा छात्रों ने यह कहा है कि उनके पास सही से काम करने वाला कंप्यूटर, स्मार्टफोन भी नहीं है, जो कि ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए आवश्यक है। सर्वे में अभी तक एसओएल के ज्यादातर छात्रों ने कहा है कि उनके घरों में पढ़ने का माहौल नहीं है, और इस स्थिति में अगर ऑनलाइन परीक्षा होती है तो ज्यादातर छात्र फेल होंगे।
केवाईएस डीयू प्रशासन से इस संबंध में मांग करता रहा है कि रेगुलर और कॉरेस्पोंडेंस छात्रों के व्यापक हित को देखते हुए डीयू द्वारा ऑनलाइन व ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने के फैसले को वापस लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, शिक्षकों और छात्रों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद परीक्षाओं के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने से पहले, सेमेस्टर और अकादमिक सत्र को बढ़ाया जाना चाहिए, और कक्षा शिक्षण एक निश्चित अवधि के लिए आयोजित किया जाना चाहिए। 28 मई को एसओएल छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इस फैसले के खिलाफ एक-दिवसीय सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। इस दिन एसओएल छात्रों के बीच कराये गए सर्वेक्षण के नतीजे भी घोषित किए जाएँगे।



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