देश के कई हिस्सो में बाढ़ का कहर छाया हुआ हैं. जिसका असर उत्तर प्रदेश के कई इलाको में देखा जा सकता हैं. वाराणसी के गंगा घाट के पूरी डूब चूका हैं. इसकी वजह से लोगो को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार करने में मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा हैं. घाट के पानी में चले जाने की वहज से वहा आस पास स्थित घरो के छत पर अंतिम संस्कार किया जा रहा हैं. पुराने घर के छत पर अंतिम संस्कार करने में किसी भी तरह से आसान नही हैं. लेकिन इसके अलावा कोई चारा नही हैं.
भारतीय मान्यताओं के हिसाब से वाराणसी को देश के सर्वाधिक पवित्र स्थानों में शुमार किया जाता है, और हज़ारों लोग यहां अपने सगे-संबंधियों का अंतिम संस्कार करने पहुंचते हैं, और उसके बाद अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जाता है.
वाराणसी के अलावा अंत्येष्टियां इलाहाबाद में भी प्रभावित हुई हैं. एक अधिकारी ने बताया, चिताओं को भीड़भाड़ वाली गलियों में जलाना पड़ रहा है.
उत्तरी उत्तर प्रदेश तथा उससे सटे बिहार राज्य में हाल के दिनों में एक लाख से ज़्यादा लोगों को अपने इलाके छोड़कर जाना पड़ा है, क्योंकि इन इलाकों में नदियां अपने किनारों को तोड़कर बहने लगी हैं. दोनों राज्यों में अब तक बाढ़ के चलते लगभग 30 जानें भी जा चुकी हैं.
भारतीय मान्यताओं के हिसाब से वाराणसी को देश के सर्वाधिक पवित्र स्थानों में शुमार किया जाता है, और हज़ारों लोग यहां अपने सगे-संबंधियों का अंतिम संस्कार करने पहुंचते हैं, और उसके बाद अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जाता है.
वाराणसी के अलावा अंत्येष्टियां इलाहाबाद में भी प्रभावित हुई हैं. एक अधिकारी ने बताया, चिताओं को भीड़भाड़ वाली गलियों में जलाना पड़ रहा है.
उत्तरी उत्तर प्रदेश तथा उससे सटे बिहार राज्य में हाल के दिनों में एक लाख से ज़्यादा लोगों को अपने इलाके छोड़कर जाना पड़ा है, क्योंकि इन इलाकों में नदियां अपने किनारों को तोड़कर बहने लगी हैं. दोनों राज्यों में अब तक बाढ़ के चलते लगभग 30 जानें भी जा चुकी हैं.



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