योगेश्वर कृष्ण-2 Yogeshwar Krishna -2

        


सत्यपाल सिंह चैेहान
श्री कृष्ण का जीवन बड़े तपस्वी का जीवन रहा है, लेकिन हमें जो चरित्र बार- बार परोसा जाता है वह उनके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं करता। भगवान कृष्ण नित्य प्रति इन शेाडष कलाओं में रमण करते थे अर्थात साधना करते थे। प्रातः काल में जव रा़ित्र रहती थी, जव तारा मंडल का प्रकाश जगमगाता है तव वे अपना आसन त्याग कर इन शोडष कलाओं को साध कर राष्ट्र का चिंतन किया करते थे। जैसे चारों दिषाओं को जानने का प्रयास ,पृथ्वी में कितने खनिज, खाद्य हैं, वायु में कितनी तीव्रता व तरंगें हंै,समुद्र में कितने प्रांणी रहते हैं आदि। यह विषय बड़ा गुढ़ है इसलिये संक्षेप में लिखा जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण ने वर्णन करते हुए कहा था कि प्रत्येक मानव शोडष कलाओं का बना है। जो इन कलाओं को जान लेता हैे वह सोलह कलाधारी हो जाता है। पांच ज्ञानेद्रियां,5 कर्मेंद्रियां,मन,बुद्धि,चित्त अहंकार,अंतःकरण और मधुवार्ता ये 16 कलायें हेैं।   

      कृष्ण के जीवन के विषय में जो भी जानकारी मिलती है वह अद्वितीय है। कृष्ण के पिछले जन्मों का विवरण जो उपलव्ध है उसके अनुसार वे पिछले जन्म में मध्यूनपान ऋषि थे। मध्युनपान ऋषि के विषय में बताया जाता है कि वे जव देवयान में रमण किया करते थे तव वे देखा करते थे कि यहां संसार में क्या हो रहा है? यह संसार प्रगति में कहां जा रहा है? जव यहां वैज्ञानिक यंत्रों का आविष्कार किया जा रहा था तव महाराजा कंस के पापों से आम जन परेंशान थे। तव ऐसी हालत को देख मध्युनपान ऋषि ने माता देवकी के गर्भ में आने का निश्चय किया और वे इस तरह कृष्ण के रूप में यशोदा माता के गृह पहुंचें। कृष्ण के पिछले जन्मांे का विवरण काफी लंबा है जिसे लिखना तर्क संगत न होगा। 
        वास्तव मे यह मोक्ष से परावर्तित आत्मायें संसार में आती हैं और परोपकार कर वे यहां से चली जाती हैं। वे यहां आकर समाज के लिये और भी कोई कर्म करते हैं लेकिन वे उस कर्म में व्यापते नहीं हैं। इसलिये वे अलौकिक महापुरूष कहलाते हैं।ं
     महाराज कृष्ण वेद की 16 हजार ऋचाओं को जाानते थे। जिन्हें अलंकारिक के रूप में गोपिकायें कहा जाता है। वे इन 16 हजार ऋचाओं को एकांत में बैठ कर विचारा करते, विनोद किया करते थे। लेकिन दुर्भाग्य से  कुछ नासमझों ने वेद की इन 16 हजार ऋचाओं (गोपिकाओं) को इंसानी गोपिकायें बना दिया है ं। और यह उस महायोगी का निरादर है। शेष अगले अंक में................
    
सत्यपाल सिंह चैेहान    


Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment