करोडो वर्कर्स के साथ शुरू हुआ ट्रेड यूनियन का हड़ताल- Crore workers in trade union strike

आज अपने 12 सूत्री मांगें पर सरकार की उदासीनता को देखते हुए बैकिंग, टेलीकॉम और कई अन्‍य क्षेत्रों के लाखों कर्मचारी देश भर में हड़ताल पर हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 करोड़ कर्मचारी इस हड़ताल का हिस्सा है जिससे अरबों का नुकसान होने की खबर है. कर्मचारी बेहतर वेतन के साथ सरकार की नयी श्रमिक और निवेश नीतियों के विरोध में यह कदम उठाया हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के छह कर्मचारी संगठनों ने भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल में शामिल हैं. भारतीय स्टेट बैंक समेत अधिकतर बैंकों ने कहा है कि अगर हड़ताल होती है तो उनकी सेवा प्रभावित हो सकती है. इस हड़ताल का प्रभाव देश के प्रमुख श‍हरों में देखने को मिल रहा है.

उधर, केंद्र ने सभी मंत्रालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि हड़ताल से सार्वजनिक और अनिवार्य सेवाएं प्रभावित नहीं हों.  एटक और सीटू ने सरकार के हड़ताल वापस लेने की अपील को खारिज करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर गौर नहीं किया जायेगा तक तक सरकार से बातचीत नहीं की जायेगी. इन संगठनों का कहना है कि सरकार घाटे के नाम पर सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपना चाहती है. आरएसएस समर्थित भारतीय मजदूर संघ के अलावा सभी मजदूर संगठन इस हड़ताल में शामिल हो रहे हैं.

इन 12 सूत्री मांग में 
  1. मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये हो 
  2. न्यूनतम पेंशन 3000 हो 
  3. यूनिवर्सल सोशल सिक्यूरिटी 
  4. स्थायी व कॉन्ट्रैक्ट दोनों तरह के मजदूरों के  लिए समान न्यूनतम मजदूरी 
  5. पीएसयू के विनिवेश पर रोक 
  6. मजदूर कानूनों में नियोक्ता के हित में होनेवाले सुधार पर रोक 
  7. रेलवे, बीमा व रक्षा में एफडीआइ पर रोक 
  8. वादा कारोबार पर रोक लगे  
  9. बेसिक लेबर कानून सख्ती से लागू हो 
  10. वेतन, बोनस, पीएफ की सभी तरह की सिलिंग खत्म हो, ग्रेच्युटी में वृद्धि हो
  11. आवेदन के 45 दिनों के अंदर ट्रेड यूनियनों का अनिवार्य रजिस्टेशन
  12. रोजगार सृजन पर फोकस करना. 

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