संपादकीय
उत्तर प्रदेश में सरकार अपनी फजीहत को सुधारने का प्रयास कर रही है या परिवारिक अंतःकलह की शिकार है । ऐसा भी तो हो सकता है कि सफेद झागदार कुर्तो पर जो दाग लगे हैं, उसे छिपाने की ताना-बाना बुनी जा रही है । पिछले दो माह से समाजवादी पार्टी में घमासान मचा हुआ है । धीरे - धीरे यह घमासान अब सड़क पर आ गया है । इसके पीछे अहम मकसद 2017 का चुनाव भी हो सकता है । हमेशा सपा में परिवारिक कलह सामने तो आता है, लेकिन इसके पीछे भी बहुत बड़ा गेम छिपा रहता है । क्या इस बार भी यह अंतःकलह किसी गेम का ही हिस्सा ही है ? खैर, जो भी हो लेकिन एक बात तो जरूर है कि अखिलेश सरकार प्रदेश में अपने कार्यकाल के 4 वर्षो की कमियों को छुपाने के लिए भी परिवारिक अंतःकलह का गेम खेल सकती है । हालांकि अखिलेश सरकार प्रदेश में काम भी अच्छे किए हैं, हर वर्ग तक पहुंचने का कार्य भी किया है, लेकिन प्रदेश में आए दिन गुंडागर्दी व पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं द्वारा कमजोरों को दबाने की घटनाएं ही सुर्खियों में रहा है । खनन माफिया, भूमाफिया तथा पुलिस प्रशासन द्वारा मनमानी लोगों में ज्यादा कसक पैदा किया है । इन बुराईयों के सामने सरकार की अच्छाई भी दब गई है । अपने शासन काल में दंगा और महिलाओं पर बढ़ते अपराध को रोक पाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है । इन तमाम घटनाओं पर पर्दा डालना तथा सीएम को ‘ यंर्गी यंग मैन ’ के रूप में दर्शाने के लिए यह फैसले और अंतःकलह सतह पर लाया जा रहा है । याद करे 2007 का वह समय जब चुनाव कुछ माह ही बाकी थे तब भी बाहुबली डी0पी0 यादव को पार्टी में लाने के मुद्दे पर चाचा - भतीजा में ऐसा ही कलह पैदा हुआ था । इसी तरह अतीक अहम्मद को लेकर होने वाला है क्योंकि उसको भी पार्टी में लेने की कवायद शिवपाल यादव करने वाले हैं । हालांकि अखिलेश इस पक्ष में नहीं है । जिस मुख्य सचिव दीपक सिंघल को लेकर उठापटक मची हुई है उसे 67 दिन पहले ही इस पद पर लाया गया था । बताया जाता है कि अखिलेश सिंघल को इस पद पर लाना नहीं चाहते थे, लेकिन शिवपाल यादव और मुलायम सिंह के दबाव में उसे मुख्य सचिव के पद पर बैठाना पड़ा । याद हो कि कुछ माह पूर्व ही शिवपाल यादव मंत्री पद से इस्तीफा देने, तथा पार्टी छोड़ने की हवा फिजा में फैलाए थे । इसे लेकर भी जोरों की चर्चा चली थी । अंत में नेताजी मुलायम सिंह ने हस्तक्षेप कर मामला शांत किया था । बताया जाता है कि उसी समय मुख्यमंत्री दीपक सिंघल को हटाना चाह रहे थे, लेकिन दबाव में ऐसा नहीं कर पाये । दीपक सिंघल को इस पद से हटाने के बाद अपने करीबी राहुल प्रसाद भटनागर को प्रमुख सचिव के पद पर बैठाया । उसी के साथ ही मुलायम सिंह ने अखिलेश को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से हटा कर यह जिम्मेदारी शिवपाल यादव अपने छोटे भाई को दे दी । इस घटना के कुछ समय बाद ही अखिलेश ने भी सरकार में परिवर्तन करते हुए शिवपाल के पास से लोक निर्माण और सिंचाई विभाग जैसे अहम मंत्रालय छिन लिया । पीडब्लूडी विभाग अखिलेश ने अपने पास रखा है । इस परिवर्तन के पीछे वजह जो भी हो, लेकिन यह तो मानना ही पड़ेगा कि मुख्यमंत्री सरकार की स्वच्छ छवि अब दिखाने का प्रयास कर रहे हैं । वैसे दीपक सिंघल पर भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं और वे कई बार सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री को नीचा दिखाने का कार्य भी किए हंै । यहां तक कि एक बार सिंघल ने मुख्यमंत्री को बच्चा तक कह दिया था । यह भी आम चर्चा है कि दीपक सिंघल का शिवपाल यादव, मुलायम सिंह और अमर सिंह से बहुत ही घनिष्ठ संबंघ है । कहा जाता है कि बड़े पैमाने पर सिंघल द्वारा शिवपाल को कई तरह की हिस्सेदारी दिलाने में भी अहम भूमिका है ।



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