19 बैंकों के 32 लाख कार्ड डेटा में सेंघमारी By संजय त्रिपाठी 19 banks in the 32 million card data burglary


                                           संपादकीय 
देश में डेबिट कार्ड की डेटा चोरी का सबसे बड़ा मामला सामने आया है जिसके तार चीन से जुड़ रहे हैं । अभी कम से कम 19 सरकारी और प्राइवेट बैंको के 32 लाख डेबिट कार्ड का सिक्योरिटी डेटा चोरी होने की आशंका जताई जा रही है । जिसमें 26 लाख वीजा व मास्टर कार्ड तथा 6 लाख रूपे कार्ड है । यह संख्या और भी बढ़ सकती है । वित्तीय आकड़ों में सेंघ लगाने की यह देश के साथ ही शायद दुनिया की भी सबसे बड़ी घटना है । बैंक इन्हें ब्लाॅक करने में लगी है । स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने अपने सवा छह लाख ग्राहकों के एटीएम कार्ड ब्लाॅक कर दिए हैं । वहीं बैंक आॅफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, सेंट्रल बैंक व आंध्र बैंक ने एहतियाती कदम उठाते हुए डेबिड कार्ड बदले हैं ।  भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रभावित बैंकों को निर्देश दिए हैं वे 17.5 लाख डेबिट कार्ड तुरंत बदलें क्योंकि इनके आंकड़े असुरक्षित हैं । यह भी दावा किया जा रहा है कि 641 लोगों के करीब 1.3 करोड़ रू. की गलत निकासी की गई है । इलेक्ट्राॅनिक लेन देन की निगरानी करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट काॅर्पाेरेशन आॅफ इंडिया के अधिकारी ने बताया कि ‘ चीन से गड़बड़ी की सूचना मिल रही है । हम रिजर्व बैंक और अन्य बैंको के साथ मिलकर जांच कर रहे है ।’  इस बीच सभी बैंको को अतिरिक्त सुरक्षा के कदम उठाने की सलाह दी गई है । इस सइबर डकैती के शिकार हुए 19 बैंको में सबसे ज्यादा प्रभावित बैंक एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, येस बैंक और एक्सिस बैंक के कस्टमर  हैं । गौर करने वाली बात है कि एक तरफ देश में बैंकिंग की अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने की कवायद चल रही है, दूसरी तरफ इसे लेकर पुराने माइंडसेट से मुक्ति नहीं मिली है । इस समय देश में 60 करोड़ डेबिट कार्ड हैं, जिसमें 19 करोड़ तो रूपे कार्ड हैं जबकि बाकी वीजा और मास्टरकार्ड हैं ।  अधिकांश बैंकों ने अपने ग्राहकों से एटीएम पिन बदलने को कहा है । बाताया जा रहा है कि मई से जुलाई के बीच में यह डेटा चोरी की घटना हुई है, लेकिन बैंको को सितम्बर में इसकी जानकारी मिली है । अधिकाश  डेबिड कार्ड धारकों का कहना है कि उनके पास पासपोर्ट तक नहीं है, परन्तु उनके कार्ड से रकम की निकासी चीन में हुई है । जांच एजेंसी  इस साइबर क्राइम को लेकर हैरान है, क्योंकि चीन में निकासी के पीछे कोई बड़ी साजिश माना जा रहा है । कंप्यूटर व साइबर जगत में भारत का लोहा अमेरिका भी मानता है फिर भी देश में ऐसी घटना सोचनीय है । माना जा रहा है कि यह सूरक्षा चूक ‘ हिताची पेमेंट्स सर्विसेज प्रणाली में एक मालवेयर के जरिए हुई है । यह कंपनी येस बैंक को सेवा देती है । हिताची पेमेंट्स एटीएम सर्विसेज, प्वाइंट आॅफ सेल सर्विसेज, इमजिंग पेमेंट्स सर्विसेज आदि के जरिए सेवाएं देती है । इस बात की भी चर्चा है कि जन धन येजना के तहत जिस अफरातफरी में खाते खोले गए, उससे हैंकरों को डेटा तक पहुंच आसान हो गई । आज भी बहुत से लोग एटीएम पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि उन्हें इस पर संदेह ही बना रहता है । यहां तक कि शिक्षित वर्ग भी जो इस क्षेत्र में उतनी पकड़ नहीं बना पाए हैं उन्हें एटीएम की कार्यशैली पर विश्वास नहीं होता ।  आये दिन एटीएम से फर्जी निकासी की घटनाएं भी रही - सही कसर पूरी कर देती है । सरकार को आंकड़ों के हिफाजत के लिए कोई नई सिस्टम प्रणाली पर विचार करना चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बैंकों पर बना रहे । बैंकिग व्यवसाय भरोसे पर ही चलता है । हालांकि वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आज कहा कि डेबिट कार्ड के मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी गई है । खासतौर से इसके पीछे विचार नुकसान को थामना है ।
संजय त्रिपाठी
tripathi.sanjay290@gmail.com

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