जासूसी और हमला - बौखलाया पाक By संजय त्रिपाठी Espionage and attack - infuriated Pakistan

         

                                                              संपादकीय 

र्जिकल स्ट्राइक से बौखलाया पाकिस्तान भारत को बड़ा नुकसान पहुंचाने में लगा हुआ है, लेकिन भारत भी हर स्तर से सचेत है और मुंहतोड़ जवाबी कर्रवाई कर रहा है । पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई हर तरह से भारत के नुकसान के लिए तरह 7 तरह के साजिशों को अंजाम दे रही है । दोनों देशों के मध्य तनाव तथा पाक द्वारा बार - बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर भारतीय चैकियों व वस्तियों पर गोलीबारी के बीच पाक उच्चायोग के एक अधिकारी समेत तीन भारतीय गद्दारों के जासूसी के आरोप में पकड़े जाने से स्पष्ट हो गया है कि पाक किसी भी तरह भारत का नुकसान चाहता है । हालांकि सरकार ने सही निर्णय लेते हुए पाक उच्चायोग के पकड़े गए कर्मचारी को देश निकाला दे दिया है । विदेश मंत्रालय ने पाक उच्चायुक्त को तलब कर उन्हें सख्त हिदायत दी है कि उनका कोई भी सदस्य शत्रुतापूर्ण कार्रवाई न करे । पाक उच्चायोग के वीजा विभाग में कार्यरत महबूब अख्तर को दिल्ली पुलिस ने जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया तो उसने कबूल किया कि वह आईएसआई के लिए गुप्त सूचनाएं एकत्र करने और मुहैया कराने में शामिल रहा है । उसके पास से एक फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है, क्योंकि पहले वह खुद को भारतीय बता रहा था । लेकिन जब कार्ड की जांच की गई तो वह फर्जी निकला । फर्जी आधार कार्ड में उसका नाम महबूब राजपूत और पता दिल्ली के चांदनी चैक का दर्ज करा रखा था । उसने जो मकान नंबर आधार कार्ड पर दिया है वह वास्तविक में जीबी रोड का है । आरोप है कि महबूब अख्तर ने सीमा पर बीएसएफ की तैनाती बताने वाले तथा कुछ और रक्षा दस्तावेज आईएसआई को मुहैया कराए हैं । महबूब अख्तर आईएसआई में हवलदार था । उसे भारत में पाक उच्चायेग के वीजा विभाग में नियुक्ति ही इसलिए की गई थी कि ताकि वह वीजा लेने वालों को जासूसी के लिए फांस सके । वह जासूसी नेटवर्क को फैलाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करता था और पैसे भी देता था । पाक उच्चायेग में बैठ कर ये अधिकारी हनी ट्रैप से भारतीय अधिकारियों को फसाते और ब्लैकमेल भी करते थे । इनके निशाने पर वे अधिकारी होते हैं जो सीमा पर तैनात जवानों की गुप्त जानकारी उपल्बध करा सके । बताया जाता है कि इस जानकारी के माध्यम से एक बार फिर मुम्बई जैसी हमले की योजना बनाई जा रही है । हालांकि इस मामले में महबूब अख्तर के साथ ही राजस्थान के तीन लोगों में से दो को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है जो उससे पैसे लेकर सूचनाएं साझा करते थे । एक फरार बताया जा रहा है जिसके गिरफ्तारी के प्रयास जारी है । इस मामले में विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर अख्तर के जासूसी के प्रमाण सौंप दिए हैं । अंतराष्ट्रीय कानूनों के तहत उच्चायोग के कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं कर सकते, इसलिए उसे पाक उच्चायोग को सौंपना पड़ा । लेकिन उसे भारत छोड़ने के लिए सरकार ने आदेश दे दिया । उधर ‘ खीसियानी बिल्ली ख्ंाम्बा नोंचे ’ तैसी स्थिति पाकिस्तान की हो गई और वह भी झुलझुलाकर पाक के भारतीय उच्चायोग में कार्यरत एक कर्मचारी सुरजीत सिंह को अपने यहां अवांछनीय व्यक्ति बताकर परिवार समेत पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दे दिया । पाक के विदेश सचिव एजाज चैधरी ने भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावले को बुलाकर उन्हें मामले कि जानकारी दी । हालांकि पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप का कोई ब्योरा नहीं दिया है । कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि प्रतिक्रियास्वरूप तथा झुलझुलाहट में यह कदम उठाया है, और अपना पलडा बराबर करने की कोशिश की है । भारत में स्थित पाक उच्चायोग हमेशा से ही साजिश रचने और जासूसी का गढ बना रहा है ।  इससे पहले 2003 में पाक उच्चायोग का एक कर्मचारी अलगाववदियों को धन मुहैया कराते हुए पकड़ा गया था । इस मामले में तत्कालीन पाक उच्चायुक्त अशरफ जहांगीर काजी का भी नाम समने आया था । इसके बाद भारत सरकार द्वारा पाक उच्चायुक्त समेत चार कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया था । उस समय पाक ने हमारे राजनयिक सुधीर व्यास के साथ काफभ् दुर्यव्यवहार किया था । यह बात तो पहले ही उजागर हो चुकी है कि पाक उच्चायोग कश्मीर में तोडफोड़ की कार्रवाइयों को जारी रखने के लिए हुर्रियत और अलगाववादी संगठनों को तैयार  करता है। इससे पहले भी कई पाक जासूस पकड़े जा चुके हैं। अशरफ जहांगीर काजी के बारे में तो यह बात साबित हो गई थी कि वह कश्मीरियों को खुद अपने हाथों से पैसे देता था जो हुर्रियत नेता अबुल गनी वटट को पहुंचाए जाते थे। हुर्रियत ने घाटी को बंद कर रखा है, 3 माह से स्कूल नहीं खुल रहे, 20 लाख बच्चे घरों में बैठे हैं। कश्मीरी बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो बढ़ेंगे कैसे। यह कश्मीरी आवाम भी समझ नहीं रही। भारत को यह भी सोचना होगा कि जब अपने शरीर के किसी अंग में नासूर बन जाता है तो उसका भी अंत में आॅपरेशन करना पड़ता है । लग यह रहा है कि काश्मीर भी हुरियत और अलगाववादियों के कारण नासूर का रूप लेता जा रहा है । सबसे अहम सरकार के लिए उस पर रोक लगाना है जिसमें कुछ भारतीयो द्वारा आज भी जयचंद और मीरजाफर का रोल अदा किया जा रहा है । अपने देश के उन गद्दारों को तुरंत सजा का प्रवधान करे जो पाक के लिए सामरिक महत्व के मामले को गंभीरता से नहीं लेते । केंद्र सरकार को ऐसे समय में सजग और चैकना रहना है क्योंकि पाक बौखलाया हुआ है । हमारे जाबांजों पर हमें गर्व है भारत पर कोई भी आंच नहीं आने देंगे । 
                                                                                                             संजय त्रिपाठी 
                                                                                                      tripathi.sanjay290@gmail.com



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