वसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता ) मेवाड़ संस्थान में वैकल्पिक विवाद समाधान विषय पर मंगलवार को एक गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश की अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की गयी। पीड़ितों को समय से न्याय न मिलने से चिंतित अधिवक्ताओं का सुझाव है कि अदालतों में मामले ले जाने से पहले उनका आपसी सहमति से निबटारा हो जाना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता अक्सा एस. फातिमा ने विवाद समाधान के विकल्पों की कानून के विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि वैकल्पिक विवाद समाधान में कुछ ऐसे तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर अदालत में जाए बिना विवादों का समाधान आपसी सहमति से किया जा सकता है। ये तरीके हैं- माध्यस्थम्, मध्यस्थता, मोल-भाव, समझौता आदि। उन्होंने बताया कि इन तरीकों से अनेक लाभ मिलते हैं। जैसे- यह सरल व द्रुतगामी प्रक्रिया है। इसमें गोपनीयता बनी रहती है। यह प्रक्रिया कम खर्चीली होती है। इसमें समयावधि का निर्धारण किया जा सकता है। सुश्री फातिमा के अनुसार खाप पंचायतों के जरिये भी न्याय मिलने में आसानी रहती है। वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ कुमार ने भी वैकल्पिक विवाद समाधान को समाजहित में उचित ठहराया और इसके जरिये जल्द न्याय मिलने की प्रक्रिया को बेहतर करार दिया। मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डाॅ. अलका अग्रवाल ने दोनों अतिथि अधिवक्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मेवाड़ लाॅ इंस्टीट्यूट के महानिदेश भारत भूषण, शिक्षण स्टाफ एवं भारी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। संचालन मेघा जुनेजा ने किया।
0 comments:
Post a Comment