पुलिस हिरासत में गई दो हजार लोगों की जान Two thousand deaths in police custody

नई दिल्ली, ( एजेंसियां )  देश में गत एक साल में न्यायिक और पुलिस हिरासत में करीब दो हजार लोगों की मौत हुई है। इनमें भी सबसे अधिक 428 मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में हुई हैं। यह जानकारी शुक्रवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार (एनएचआरसी) के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एचएल दत्तू ने दी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए जस्टिस दत्तू ने कहा, पिछले वर्ष अक्तूबर से इस साल सितंबर तक 1757 लोगों की मौतें न्यायिक हिरासत में हुई है, जबकि 192 लोगों की मौत पुलिस हिरासत में हुई। उन्होंने कहा, देश में मानवाधिकारों की स्थिति कुल मिलाकर ठीक है। लेकिन अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। जस्टिस दत्तू ने बताया, आयोग को मानवाधिकार हनन के बारे में हर साल एक लाख से अधिक शिकायतें मिलती हैं। इससे पता चलता है कि लोगों में अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ी है और उनका मानवाधिकार आयोग में भी विश्वास बढ़ा है।

एनएचआरसी प्रमुख ने कहा कि इस संस्था में लोगों का विश्वास बरकरार रखने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की है। यह विश्वास बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को आयोग की सिफारिशों को अपवाद स्वरूप भी नजरंदाज नहीं करना चाहिए।

इन राज्यों में सबसे अधिक मौंते
राज्य मौतों की संख्या
उत्तर प्रदेश 428
पंजाब 170
मध्य प्रदेश 165
महाराष्ट्र 128
पश्चिम बंगाल 98
राजस्थान 93
बिहार 90
झारखंड 70

पुलिस भी दागदार
32,498 शिकायतें पुलिस ज्यादती की मानवाधिकार आयोग के समक्ष दर्ज कराई गई हैं

मुठभेड़ों पर सवाल
206 मुठभेड़ों में मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत दर्ज की गई
66 मामले इनमें से अकेले नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के हैं
43 असम, 15 झारखंड और 10 मामले ओडिशा में भी दर्ज हैं

आयोग पर बोझ
1 लाख से अधिक शिकायतें हर साल आयोग में दर्ज कराई गई
1.11 लाख मामलों का गत एक साल में निपटारा किया गया है
37 हजार नए और पुराने मामले अभी भी आयोग के समक्ष लंबित

इन राज्यों का रिकॉर्ड खराब
46 हजार से अधिक मामले अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज कराए गए
10-10 हजार के शिकायतों के साथ ओडिशा और हरियाणा का स्थान

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