संपादकीय
500 और 1000 रूपए के नोट बंद होने के एक सप्ताह के बाद लोगों की समस्या और बढ़ती जा रही है । पूरे देश में सुबह से शाम तक बैंकों के पास लोगों की अफरा - तफरी देखने को मिल रही है , यहां तक कि मजबूरियों में फंसे लोगों की मृत्यु की समाचार भी सामने आ रही है इससे यह प्रतीत होता है कि सरकार नोटबंदी लागू करने से पहले इसके सभी पहलुओं पर विचार नहीं की थी । हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता की समस्यों से अनजान नहीं है, क्योंकि उन्होंने एक दिन में तीन मंचों से लोगों से भवुक अपील की है । इससे ऐसा लगता है कि नोटबंदी नियम लागू करने के बाद प्रधानमंत्री को वास्तविक परेशानियों को देखने व समझने का मौका मिला है । इससे लोगों में काले धन से निपट लेने का हौसला तो जगा है लेकिन इससे पैदा हुई रोजमर्रा की दिक्कते लोगों को बेहाल कर दिया है । अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूराने नोट बंद कर नए नोट लाने से काले धन पर कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ने वाला , क्योंकि काले धन का एक छोटा हिस्सा ही नगदी के रूप में होता है । इस लिए सरकार को कोई और कदम उठाने चाहिए । अगर काले धन पर सरकार के इस प्रयास से सफलता मिलती है तो इससे बड़ी बात क्या होगी, लेकिन नोटबंदी के फैसले का दंश लोगों को जिस तरह आज झेलना पड़ रहा है यह सरकार के अदूरदर्शी फैसला को दर्शाता है । लोकल इंटेलिजेंश एजेंसी ने सरकार को इनपुट दिया है कि अगर दो दिन के अंदर कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई तो पूरे देश में अशांति की विकट समस्या पैदा हो सकती है । इस फैसले के बाद माना जा रहा था कि बैंको और एटीएम में भीड़ तो होगी लेकिन चार - पांच दिन या हप्ते भर में स्थिति राहत भरी हो जायेगी । लेकिन अंतहीन भीड़ ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है । अनगिनत लोगों को नोट बदलने व बैंक में जमा करने के लिए किस किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड रहा है इसकी बयान नहीं किया जा सकता । आप कल्पना कर सकते हैं कि लोग रात में रजाई लेकर बंद बैंको के गेट पर सोकर बैंक खुलने का इंतजार कर रहे हैं । मजदूर तबके वाले और ज्यादा परेशान हैं क्योंकि नोकरी करने जाए या बैंक पर लाइन लगाए उनके सामने यह बड़ी समस्या है । कई लोगों ने बैंको के सामने शादी के पूरे रकम न मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दे रखे हैं । दादरी में रकम की निकासी बैंक से न होने के कारण शादी के लिए आया एक बारात को वापस जाना पड़ा । अभी तो यह छोटे नमूने हैं वहुत ऐसे है जिसकी जानकारी हम लोगों तक नहीं पहुंच पाई है । देश के 40 प्रतिशत एटीएम ही काम कर रहे हैं,बाकी बंद है । कुछ ऐसे मामले सामने आए है जो लोगों के हौसले तोड़ने का काम कर रही है । बताया जाता है कि पंश्चिम बंगाल में नोटबंदी की घोषणा होने के ठीक आठ दिन पहले बीजेपी की स्थानीय इकाई ने बैंक में तीन करोड़ रूपए जमा कराई । तमिलनाडु से पहले खबर आई कि चुनावी इस्तेमाल के लिए ले जा रहे दो हजार के नोटों की गड्डियों की शक्ल में सात करोड़ 85 लाख रूपए सीज किए गए । बाद में पता चला कि ये रूपए बैंक आॅफ बडौदा के थे । सोशल मीडिया पर 500 और 1000 के नोट बंद होने की सूचना पहले ही लीक होने की बात कही जा रही है । अगर सूचना जान - बुझ कर लीक की गई है तो मामला संगीन है । एक और ऐसा मामला सामने आया है जो यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि अभी पूर्ण रूप से 2000 के नोट बाजार में आया नहीं लेकिन इसका नकली नोट तेजी से सामने आ रहा है । तेलंगाना में सोमबार को दो युवको को 2000 रूपए का नकली नोट चलाने के प्रयास में गिरफ्तार किया गया है । घटना महबूबाबाद जिले के कौरवी मंडल की है । प्रदीप नामक युवक गिरफ्तार किया गया है । सरकार को नोटबंदी के मामले में सजग होकर तथा लोगों को विश्वास में लेकर आगे बढना होगा , ताकि लोगों का मनोबल समस्या से जूझने के बाद भी बना रहे ।
संजय त्रिपाठी
tripathi.sanjay290@gmail.com




0 comments:
Post a Comment