संपादकीय
इतने दिनों की आम जनता की परेशानी, बेकार का परिश्रम, पैसों की बर्बादी, करीब 100 की मौत और खुदकशी के कीमत पर अगर काला धन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार आदि पर अभी भी अंकुश लगता नहीं दिख रहा है , तो ऐसी स्थिति में सरकार की जवाबदेही बढ़ जाती है । नोटबंदी के बाद आये दिन आयकर के छापेमारी में नए नोटों का मिलना कई तरह के सवाल खड़ा कर रहे हैं । आज भी लोगों को बैंको व एटीएम पर लाईन में देखा जा रहा है , जबकि 33 दिन की नोटबंदी के बाद भी अभी आम आदमी को राहत मिलता नजर नहीं आ रहा है । एक तरफ लोग अपने घरेलु खर्चो को पूरा करने में अभी भी नोटबंदी के कारण परेशान हैं तो दूसरी तरफ नए नोटों की बरामदगी का जखीरा रोज - रोज सामने आ रहा है । अब तक जितने नए नोट बड़े और दलालों के पास से बरामद हुए हैं, उतने में कई लाख लोगों को 24 हजार के हिसाब से रकम मिल सकता था । सोचने वाली बात तो यह है कि जिस भ्रष्टाचार व काला धन को पकड़ने या इस पर रोक लगाने के लिए मोदी सरकार ने यह योजना चलाई अब तक वह बढ़ने के वजाय घटता किसी भी नजरिए से नहीं दिखाई दे रहा है । कैश की किल्लत के बीच बड़ी मात्रा में नए नोट मिलने से बैंकों पर सवाल उठने लगे हैं । एक नजर इस तरफ भी दौड़ा कर देखें - शनिवार को चार शहरों में छापों के दौरान 33.56 करोड़ रूपए के नए नोट जब्त हुए । सारी नोट दो हजार के नए नोटों में है । इनमें कर्नाटक के चित्रदुर्ग में हवाला एजेंट के धर के बाथरूम में तिजोरी से मिले 6.6 करोड़ रूपए इसमें 5.7 करोड़ दो हजार के नए नोट थे । नई दिल्ली के ग्रेटर कैलास इलाके में एक वकील के घर से 10 करोड़ रूपए बरामद हुए हैं, जिसमें 2.5 करोड़ रूपए नई करेसी में हैं । तमिलनाडु के बैलोरों में 24 करोड़ के नाए नोट मिले । अब तक उसके ठिकानों से 34 करोड़ रूपए नए करोंसी में है । यह सारी रकम रेत करोबारी ठेकेदार शेखर रेड्डी के हैं । हैदराबाद में डाकधर के सीनियर सुपरिंटेडेंट के रिस्तदारों से नए नोट में 65 लाख की रकम मिली है ं । कर्नाटक के बैंगलुरू में 4.7करोड़, उडुपी में 71 व चिकमंगलूर में 81 लाख रूपए मिले । गुजरात के सुरत में 76 लाख और सांबरकांठा में 8 लाख रूपए के नए नोट जब्त किए गए । महाराष्ट्र के मुम्बई के दादर इलाके मं 72 लाख रूपए नई करेंसी में बरामद हुए थे । हरियाणा के गुडगांव में भी 6 दिसंबर को 10 लाख रूप्ए की नई करेंसी मिली । ओडिशा के संभलपुर में 8 हथियार बंद लोगों से 1 करोड़ 42 लाख के नाए नोट बरामद हुए । मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में एक्टर राहुल चेलानी से 43.6 लाख के नए नोट जब्त हुए हैं । असम के हाटीगांव में 20 लाख रूपए बरामद हुए हैं । इससे पहले भी विभिन्न राज्यों से बड़े पैमाने पर नए नोट पकड़े जा चुके हैं । जगह - जगह पुलिस ने भी नाकेबंदी कर के गाड़ियों में से भी भरी मात्रा में नए नोट पकड़े हैं । पिछले महीने कश्मीर में मारे गए दो आतंकवादियों के पास से भी 2 हजार के नए नोट बरामद किए गए थे । आयकर विभाग की छापेमारी से मिले पैसों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि काला धन जमा करनेवालों ने किस तरह सरकार की घोषित चाकचैबंद योजना में बड़ी आसानी से सेंघमारी की है । एक हजार और पांच सौ रूपए के पुराने नोट बंद करने के पीछे सरकार की योजना थी कि इससे बड़े स्तर पर काला धन सामने आयेगा । सरकार ने शुरूआती दौर में गैर कानूनी तौर पर रखे पैसे को जमा करने पर कर भुगतान को लचीला रूख में रखा था । पुरानी नगदी बदलने और पैसा निकालने की भी सीमा रखी गई थी । रोज नए नियम बनाए जाते रहे । आयकर कानून में संशोधित कर कहा गया कि अगर कोई अपनी नाजायज संपति घोषित करेगा, तो सरकार उसका पचास फीसदी हिस्सा रख कर बाकी को जायज करार दे देगी । मगर उसका भी कोई खास नतीजा सामने नहीं आया । इसकी बड़ी वजह यही होगी की लोगों को बैंको से सांठगांठ कर पुराने नोंटों के बदले नए नोट आसानी से मिल जा रहे होगें । हालांकि काले धन को सफेद करने के मामले में कुछ बैंककर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर गिरफ्तार भी किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इतने बड़े नोटबंदी की योजना कुछ बैंककर्मियों के लोभ व लालच के कारण अब तक सफल नहीं हो पाई है । देखा जाए तो सरकार की काले धन पर अंकुश लगाने की कोशिश काफी हद तक बेकार गई है । सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस नोटबंदी के कारण आज भी लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं, लेकिन सरकार बाद में जागरूक हुई । अगर वह समय रहते जागरूक होती तो कुछ रसुकदार और पूंजीपति या दलालों के पास आसानी से नए नोट नहीं पहुंच पाते । जो अब प्रधानमंत्री मोदी के तरफ से बैंको में स्टिंग आॅपरेश्न कराए जा रहे हैं, अगर वह इस योजना के शुरूआत में ही कराए जाते तो शायद काला धन सामने आ पाता । कहा जा रहा है कि अब भी सरकार की मजबूरी है कि वह जिन 500 बैंकों के ब्रांचों में स्टिंग आॅपरेश्न कराई है तथा जिसमे से 400 से ज्यादा सीडी वित्त मंत्रालय पहुंच चूंकी है उनके खिलाफ भी मार्च या अपै्रल में कार्रवाई की जायेगी । इसका सबसे बडा कारण यह है कि बैंकों के खिलाफ करेंसी संकट से सरकार मुक्त होने तक इस पर अमल करना नहीं चाहती । जो कर्रवाई सरकार आज शुरू की है अगर वह नोटबंदी योजना लागू करने के साथ ही शुरू कर देती तो अपने मकसद में कामयाब होती और आम जनता को इतनी परेशानी भी नहीं उठानी पड़ती । मोदी जी - बहुत देर कर दी हूजुर आते - आते ........!
संजय त्रिपाठी





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