संपादकीय
अब लगता है कि आम आदमी जिस तरह अब तक खामोशी से कालाधन से देश को मुक्त देखने की लालसा को लेकर परेशानियां उठ रहा था वह सीमा अब समाप्त होती जा रही है । आम जन अब अधीर होता जा रहा है । लोगों के मन में अब यह बात धर करती जा रही है है कि काला धन के जगह आम जन परेशान है और काला धन वाले आज भी आराम की जिंदगी बिता रहे है । अब लोगों के समझ मे धीरे - धीरे यह आ रहा है कि अब तक इस नोटबंदी प्रकरण के शिकार हुए मरने वाले 52 लोगों में कोई भी न तो पूंजीपति है और न उधोगपति । यहां तक कि न तो कोई नेता या जम्मीदार ही इसका शिकार हुआ , आखिर क्यों ? अब तक जितने भी लोगों को इस नोटबंदी संकट ने लीला है वह एक आम आदमी है जिसे काला धन से कोई मतलब नहीं है । अगर देश का काला धन सरकार को मिल जाता है तो भी उसे अपना या अपने परिवार का पालन पोषण करने करने के लिए मजदूरी और मेहनत करना ही पड़ता । मोदी जी ने चुनाव के दौरान जरूर कहा था कि विदेशों में जमा किया गया हजारों करोड़ का काला धन देश में लाकर आम लोगों के खाता में 15 लाख की रकम दी जायेगी । लकिन विदेश का काला धन तो देश में अभी आया ही नहीं , हां अपने देश के कालाधन को लेकर जरूर उन्होंने नकेल कस दिया । इस काला धन के निकासी में आम लोगों की जिंदगी बद् - से - बद्तर हो गई है । दिन - पर - दिन मरने वालों की संख्या एक - एक कर बढती जा रही है । अब भी कुछ लोग कह रहे हैं कि इतनी बड़ी मोदी के लड़ाई में तो कुछ लोगों को परेशानी तो उठानी ही पड़ेगी । यह भी ठीक है जब बड़ी लड़ाई होती है तो कुछ लोगों को अपनी कुर्बनी देनी भी पड़ती है, तो क्यों नहीं अब तक जो इस नोटबंदी संकट से जुझते हुए अपने प्राण त्यागे हैं उन्हें एक शहीद का दर्जा देते हुए कोई - न - कोई सम्मान दिया जाए, चाहे वह पदक हो या वजिफा । क्योंकि इन सभी शहीदों ने किसी न किसी रूप में देश को काला धन से मुक्त करने के लिए अपनी कुर्बानी दी है । अंग्रेजो से भारत को मुक्त कराने के लिए भी कुर्बानी की जरूरत पड़ी थी । उस समय कुर्बानी देने वालो के परिवार को आज भी सभी तरह के सहुलियत मिलता है तो इन्हें उस सहुलियत से सरकार क्यों महरूम करना चाहती है । सरकार के खिलाफ आज भी लोगों में एक उम्मीद बंधी है कि काला धन के लिए मोदी ने यह ठोस कदम उठाया है और इसमें हमें सहयोग करना चाहिए । इसी उम्मीद के सहारे लोग मोदी के ‘ आपाताकल ’ को अभी भी खुशी - खुशी झेल रहे हैं । लोग दिन - रात लाईनों में खड़े हैं, खड़े - खडे दम तोड़ रहे हैं , किसानों की खेती चैपट हो रही है, मजदूर हाथ - पर - हाथ धरे बैठे हैं , दुकानदार मंदी के शिकार हो रहे हैं, वेतनभोगियों को तनख्वाह भी समय से नहीं मिल रहा है, शादिया मातम में बदल रही है , लेकिन किर भी लोग मौन हैं, आखिर क्यों ? क्योंकि लोगों के दिमाग में यह बैठ गया कि मोदी ने जो नोटबंदी की है, वह देशहित के लिए है । आम आदमी यह सोच रहा है कि मोदी ने कालाधन का जो नकेल कसा है वह अमीरों पर पहली बार कसा गया है । आम आदमी की सोच है कि हमारे कमाई पर मौज - मस्ती करने वाले अमीर अब फंसे हैं हैं । वे लोग अमीरों पर पड़ने वाले दुख से अंदर ही अंदर खुश है , इसलिए बिरोध का स्वर मुखर नहीं हो रहा है । यह मानव की प्राकृतिक प्रवृति है कि अपने से बड़े चाहे वह जाति की दुष्टि से हो या पूंजी की दृष्टि से जब उस पर मुश्किल आता है तो हम अन्र्तमन से खुश होते हैं । आज यही स्थिति आम जन की भी है । आप सोचे जब एक दलित वर्ग का नेता उच्च जातियों को लक्षित कर भाषण देता था तो सभी दलित समुदाय उसके पक्ष में झुम उठते थे । क्योंकि इससे उनके मन को शांन्ति मिलती थी कि अब उच्च जातियों की स्थिति हमसे भी बद्त्तर हो जायेगी । इसका फायदा लोगों ने उठाया और उठा भी रहे हैं । इसी तरह आम जन को लग रहा है कि मोदी की इस कदम से बड़े लोगों, उधोगपतियों, बड़े व्यापारियों, जम्मीदारों पर अब उनके मनमानी पर अंकुश लगेगा। जब जन - धन खाता खोलने की शुरूआत हुई तो लोगों ने खुब - बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया क्योंकि उन्हें उम्मीद था कि मोदी जी उनके खोते में 15 लाख का काला धन डलवायेगे । शायद यह भी उन्हें उम्मीद हो कि इस नोटबंदी से भी पूंजीपतियों, उधोगपतियों, जम्मीदारों व बड़े लोगों का कालाधन उनके खाते में आ सकता है । लेकिन अब धीरे - धीरे जैसे लोग परेशान हो रहे है उनके मन से बंधी उम्मीदे छंटती जा रही है । इसी का नतीजा है कि अब लोग जगह - जगह बैंक और सरकार के खिलाफ मुखर हो रहे हैं । यूपी मे तो लोगों का गुस्सा इस कदर बढ़ गया कि कई जगह लोगों ने सड़क जाम किया तो कई जगह बैकों के अधिकारियों व कर्मचारियों पर लोगों ने अपना गुस्सा उतारा । लगता है कि अगर सरकार की यही रवैया रही तो लोगों के सब्र का बांध जवाब दे देगा और पन्द्रह - बीस दिन बाद लोगों के उग्र स्थिति से सरकार को जूझना पड़ेगा । क्योंकि ज्यादा दिनों तक देश में सुधार के नाम पर लोगों को परेशानी में नहीं डाल सकते । मोदी जी .......! कोई ठोस कदम उठाये नही ंतो यह निर्णय गलत भी हो सकता है ।
संजय त्रिपाठी




0 comments:
Post a Comment