वाशिंगटन,ललित के झा (भाषा) अमेरिका का रक्षामंत्री बनने के बाद दो साल से भी कम समय में एश्टन कार्टर ने भारत और अमेरिका के रक्षा सहयोग को मजबूती और विस्तार देने के लिए भारत की रिकॉर्ड तीन यात्राएं की हैं और अपने भारतीय समकक्ष मनोहर पर्रिकर के साथ अभूतपूर्व सात बैठकें की हैं।
रक्षामंत्री के रूप में कार्टर द्वारा उनकी अंतिम भारत यात्रा पूरी करने पर पेंटागन ने कल एक फैक्टशीट जारी की, जिसमें कहा गया है कि पेंटागन में कई साल तक विभिन्न पदों पर रह चुके कार्टर ने भारत के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को ‘‘मजबूती और विस्तार देने के प्रयासों की अगुवाई’’ की।
पेंटागन ने कहा कि उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप अमेरिका और भारत के बीच उनके रक्षा संस्थानों को लेकर आपसी समझ बढ़ी है, दोनों देश नए क्षेत्रों में नजरियों का आदान-प्रदान कर रहे हैं और नीतिगत रूख पर समन्वय कर रहे हैं। वे दोनों देशों की सेनाओं के बीच संबंध को मजबूत कर रहे हैं, संयुक्त रूप से अहम तकनीकी परियोजनाएं शुरू कर रहे हैं और द्विपक्षीय रक्षा व्यापार को अभूतपूर्व स्तर पर ले जा रहे हैं।
पेंटागन ने कहा, ‘‘एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र को लेकर अपने साझा विजन को मूर्त रूप देने के लिए आज अमेरिका और भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक करीब हैं।’’ हाल के वषरें में, अमेरिका और भारत का आपस में इस कदर जुड़ाव रहा है कि कार्टर ने इसे दो देशों के बीच ‘‘रणनीतिक रूप से हाथ मिलाने’’ की संज्ञा दी है। इसमें एशिया-प्रशांत में पुनर्संतुलन की अमेरिकी नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का सम्मिलन है।



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